छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र नए भवन में शुरू, धर्मांतरण विधेयक पर तीखी बहस के आसार
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
chhattisgarh-winter-session-2025-new-assembly
नवा रायपुर के नए विधानसभा भवन में पहली बार आयोजित होने वाला यह शीतकालीन सत्र विकास योजनाओं और विवादित विधेयकों को लेकर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
धर्मांतरण संशोधन विधेयक पर सरकार और विपक्ष के आमने-सामने आने की पूरी संभावना, सत्र में तीखी बहस और विरोध के संकेत पहले से दिख रहे हैं।
14 से 17 दिसंबर तक चलने वाले इस सत्र में 628 सवालों के साथ कई विभागों की जवाबदेही और नीतिगत निर्णयों की कड़ी परीक्षा होने वाली है।
छत्तीसगढ़/ छत्तीसगढ़ में इस बार होने वाला शीतकालीन सत्र कई कारणों से खास और हंगामेदार माना जा रहा है। पहली बार यह सत्र नवनिर्मित विधानसभा भवन, नवा रायपुर में आयोजित होगा, जिसके मद्देनज़र प्रशासन से लेकर नीति-निर्धारक स्तर तक तैयारियाँ तेज हो चुकी हैं। 14 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 17 दिसंबर तक चलने वाले कुल चार दिवसीय इस सत्र को राज्य की राजनीति में बेहद निर्णायक माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कई संवेदनशील विधेयक और महत्वपूर्ण चर्चाएँ शामिल होंगी।
सत्र की शुरुआत ‘विकसित भारत 2047’ विषय पर विशेष चर्चा से होगी। माना जा रहा है कि इस चर्चा के दौरान राज्य के विकास के रोडमैप, नई योजनाओं, निवेश संभावनाओं और प्रशासनिक सुधारों पर ठोस दिशा तय की जाएगी। सरकार इस अवसर को छत्तीसगढ़ के विकास मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने के रूप में भी देख रही है। वहीं विपक्ष इस चर्चा के दौरान नीतिगत कमियों, अधूरे वादों और बजट क्रियान्वयन की गति को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
विधायकों द्वारा लगाए गए प्रश्नों की संख्या इस बार उल्लेखनीय रूप से अधिक है। कुल 628 प्रश्न सदन तक पहुँच चुके हैं, जिनमें 333 तारांकित और 295 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं। ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से सवाल भेजने का सिलसिला अभी भी जारी है, जिससे संकेत मिलते हैं कि राज्य के हर विभाग से जुड़े मुद्दों पर गहन और व्यापक संवाद होने वाला है।
सत्र राजनीतिक रूप से गर्म रहने की सबसे बड़ी वजह धर्मांतरण संशोधन विधेयक है, जिसे सदन में प्रस्तुत किए जाने की पूरी तैयारी हो चुकी है। इस विधेयक को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों आमने-सामने हैं। विपक्ष का आरोप है कि विधेयक समाज में तनाव पैदा करेगा, जबकि सरकार का कहना है कि यह विधेयक धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक संतुलन और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत करेगा। इस मामले पर सदन में तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप के आसार जताए जा रहे हैं।
चार दिवसीय इस सत्र के दौरान विकास योजनाएँ, कानून-व्यवस्था, जिला स्तर की प्रशासनिक चुनौतियाँ, बेरोज़गारी, निवेश, महिला सुरक्षा और जनहित के अन्य मुद्दों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए जाने की उम्मीद है। विधानसभा के नए भवन में यह पहला बड़ा आयोजन होने के कारण व्यवस्था और प्रोटोकॉल को लेकर भी प्रशासन की परीक्षा होगी।
जनता की निगाहें इस सत्र पर इसलिए भी टिकी हैं क्योंकि यह स्पष्ट करेगा कि सरकार आगामी वर्ष के लिए किस नीति और दिशा को आगे रखती है और विपक्ष किस रणनीति के साथ जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाता है। यदि अनुमान सही साबित हुए, तो नया विधानसभा भवन इस बार कई तीखे राजनीतिक क्षणों, कड़े तर्कों और ऐतिहासिक फैसलों का साक्षी बनेगा।