पीएमएमएल ने 2.5 करोड़ दस्तावेज़ों के डिजिटल अभिलेखागार से शोधकर्ताओं को दूरस्थ पहुंच उपलब्ध कराई
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
pmml-digital-archive-access-historical-documents-for-researchers
पीएमएमएल ने 2.5 करोड़ से अधिक दुर्लभ दस्तावेज़ों को डिजिटाइज़ कर शोधकर्ताओं को सुरक्षित और दूरस्थ अभिगम उपलब्ध कराने का बड़ा कदम उठाया।
डिजिटल अभिलेखागार के माध्यम से पंजीकृत विद्वान अब ऑनलाइन अनुरोध कर घर बैठे ऐतिहासिक दस्तावेज़ देख सकेंगे, मूल प्रतियों के संरक्षण को सुनिश्चित करते हुए।
पीएमएमएल के निदेशक ने कहा कि यह पहल आधुनिक और समकालीन भारत के अध्ययन को तकनीकी सक्षम शोध संसाधनों से सशक्त बनाएगी।
प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) ने अपनी अभिलेखीय क्षमता और शोध उपयोगिता को नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए दुर्लभ ऐतिहासिक संसाधनों के व्यापक डिजिटलीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। स्वतंत्रता के बाद से भारत के सभी प्रधानमंत्रियों की विरासत के संरक्षण के लिए समर्पित यह राष्ट्रीय संस्थान अब 2.5 करोड़ से अधिक दस्तावेज़ों के डिजिटल रूपांतरण के माध्यम से शोधकर्ताओं को अधिक सुगम और सुरक्षित पहुँच प्रदान करने के लिए तैयार है।
पीएमएमएल के संग्रह में 1,300 से अधिक प्रख्यात व्यक्तियों और प्रतिष्ठित संस्थाओं से संबंधित पत्राचार, निजी लेखन, भाषण, डायरियां और समाचार-पत्र सामग्रियों का असाधारण संकलन है, जिसे आधुनिक और समकालीन भारतीय इतिहास के गहन अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यही कारण है कि देश और दुनिया के विद्वान लगातार इस संस्थान का उपयोग शोध के लिए करते हैं।
डिजिटलीकरण परियोजना का उद्देश्य केवल दस्तावेज़ों के दीर्घकालिक संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि दूरस्थ शोधकर्ताओं को सुरक्षित माध्यम से अभिलेखीय रिकॉर्ड उपलब्ध कराना भी है। परियोजना के प्रथम चरण में, अत्यधिक उपयोग की जाने वाली सामग्रियों को स्कैन कर सुरक्षित डिजिटल प्रारूप में संग्रहित किया जा चुका है, जिन्हें नई विकसित डिजिटल प्रणाली के माध्यम से शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।
सूचना प्रौद्योगिकी मंच के जरिए विद्वानों को घर बैठे दस्तावेज़ों तक पहुंच प्राप्त करने की सुविधा दी गई है। पंजीकृत शोधकर्ता अब अभिलेखीय दस्तावेज़ों के लिए ऑनलाइन अनुरोध दर्ज कर सकते हैं और स्वीकृति मिलने पर संबंधित सामग्री उनके कंप्यूटर पर केवल देखने के लिए सुरक्षित रूप से उपलब्ध करा दी जाएगी। इस प्रक्रिया में अभिलेखागार की संवेदनशीलता, कॉपीराइट और संरक्षण प्रोटोकॉल सुनिश्चित किए गए हैं, ताकि मूल रिकॉर्ड संरक्षित बने रहें और गलत उपयोग को रोका जा सके।
यह डिजिटल अभिलेखागार पहल न केवल ऐतिहासिक संसाधनों को संरक्षित करने का माध्यम है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत के आधुनिक इतिहास के अध्ययन को सुविधाजनक और शोधोन्मुखी बनाने का शक्तिशाली कदम भी है। इससे भारतीय इतिहास के अध्ययन में तकनीकी समावेशन को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पीएमएमएल के निदेशक अश्विनी लोहानी ने कहा कि डिजिटलीकरण मिशन संस्थान की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है जो उच्च गुणवत्ता के शोध को बढ़ावा देती है और ज्ञान-संचयन को अधिक सुलभ तथा संरक्षित बनाने के उद्देश्य से संचालित है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह डिजिटल संसाधन व्यवस्था शोध समुदाय के लिए नई संभावनाएं खोलेगी तथा भारत के ऐतिहासिक अभिलेखों के संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगी।