क्यों हर साल बढ़ रही है माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई? वैज्ञानिकों ने खोजा नया कारण
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हिमालय में 89,000 साल पहले हुई नदी-डकैती ने विशाल पैमाने पर कटाव बढ़ाया, जिससे पपड़ी हल्की होने पर माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई बढ़ी। नए अध्ययन के अनुसार भू-पपड़ी के उछाल और नदी कटाव की संयुक्त प्रक्रिया ने एवरेस्ट को 50 से 165 फीट तक अतिरिक्त ऊँचाई दी।
वैज्ञानिकों ने कहा कि एवरेस्ट हर साल कुछ मिलीमीटर ऊँचा हो रहा है, लेकिन भविष्य में यह वृद्धि रुक भी सकती है या उलट सकती है।
नई दिल्ली / दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट हर साल कुछ मिलीमीटर और लंबी हो रही है। यह केवल विवर्तनिक प्लेटों की टक्कर का परिणाम नहीं है, बल्कि एक प्राचीन “नदी-डकैती” (River Capture) घटना भी इसके पीछे प्रमुख कारण है। हाल ही में नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित एक अध्ययन ने खुलासा किया कि लगभग 89,000 साल पहले एक शक्तिशाली नदी ने दूसरी नदी को “छीन” लिया, जिसके बाद तेज़ी से हुए कटाव ने हिमालयी भूभाग का एक बड़ा हिस्सा मिटा दिया। इस कटाव की वजह से पृथ्वी की पपड़ी हल्की हुई और नीचे मौजूद मैंटल की उछाल शक्ति ने हिमालय को और ऊपर उठाना शुरू कर दिया।
शोध के अनुसार, इस भूगर्भीय बदलाव ने 50 से 165 फीट तक की अतिरिक्त ऊँचाई एवरेस्ट को दी। वैज्ञानिक मानते हैं कि एवरेस्ट का लगातार बढ़ना इसी "क्रस्टल रिबाउंड" का हिस्सा है।
कैसे नदी ने बढ़ाई पहाड़ की ऊँचाई?
हिमालय क्षेत्र में स्थित अरुण नदी अचानक एक तिरछा रास्ता बनाते हुए एक रिज को काटती है। यह संकेत देता है कि कभी इसकी ऊपरी और निचली धारा अलग थीं। कंप्यूटर सिम्युलेशन से पता चला कि कोसी नदी ने पीछे की ओर कटाव करते हुए अरुण नदी को "कैप्चर" कर लिया, जिससे दोनों नदियों का संयुक्त कटाव बहुत अधिक हो गया। परिणामस्वरूप हिमालय की सतह हल्की हुई और भू-पपड़ी में उछाल बढ़ा, जिससे कई शिखर ऊपर उठे।
एवरेस्ट का निर्माण 45 मिलियन वर्ष पहले भारत और यूरेशिया प्लेट की भिड़ंत से शुरू हुआ था। आम तौर पर कटाव और प्लेट दबाव के बीच संतुलन रहता है, लेकिन नदी द्वारा असामान्य कटाव ने इस संतुलन को बिगाड़ा और एवरेस्ट सामान्य से अधिक तेज़ी से ऊपर उठने लगा। आज भी एवरेस्ट हर साल लगभग एक "स्पेगेटी की मोटाई" जितना बढ़ रहा है।
वैज्ञानिक मानते हैं कि यह वृद्धि अनंत नहीं रहेगी। कभी यह संतुलन फिर बदलेगा और एवरेस्ट की ऊँचाई में गिरावट शुरू हो सकती है। पृथ्वी की सतह हमेशा गतिशील है मानो ग्रह लंबे समय में "साँस ले रहा हो"।