SC/ST और पूर्वोत्तर युवाओं के लिए भारत का पहला 1-वर्षीय इलेक्ट्रॉनिक खिलौना प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

Sun 30-Nov-2025,01:58 PM IST +05:30

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SC/ST और पूर्वोत्तर युवाओं के लिए भारत का पहला 1-वर्षीय इलेक्ट्रॉनिक खिलौना प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
  • SC/ST और पूर्वोत्तर युवाओं को 1-वर्षीय इलेक्ट्रॉनिक खिलौना प्रशिक्षण में प्रोटोटाइप, सर्किट डिज़ाइन और ऑटोमेशन तकनीक का उन्नत व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया गया।

  • MeitY द्वारा चयनित 18 इंजीनियरों को सी-डैक नोएडा में अत्याधुनिक ई-खिलौना लैब में 6+6 महीने का संरचित R&D आधारित प्रशिक्षण दिया गया।

  • प्रशिक्षुओं को ₹25,000 मासिक वृति, उद्योग विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक खिलौना स्टार्टअप शुरू करने के अवसर उपलब्ध कराए गए।

Delhi / New Delhi :

नई दिल्ली / भारत में तकनीकी समावेशन को सुदृढ़ करने और युवाओं को उभरते हुए खिलौना उद्योग में रोजगारोन्मुख कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने देशभर के SC/ST और पूर्वोत्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए एक वर्ष का विशेष “इलेक्ट्रॉनिक खिलौना प्रोटोटाइप प्रशिक्षण कार्यक्रम” सफलतापूर्वक संचालित किया है। यह कार्यक्रम भारतीय खिलौना उद्योग में तकनीकी विशेषज्ञता को बढ़ाने और कम प्रतिनिधित्व वाले समुदायों को मुख्यधारा की तकनीकी प्रगति से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस प्रशिक्षण के तहत 18 चयनित युवा इंजीनियरों को पूरे वर्ष के लिए रिसर्च एवं विकास (R&D), इलेक्ट्रॉनिक खिलौना डिज़ाइन, ऑटोमेशन, सेंसर आधारित नियंत्रण प्रणाली और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के आधुनिक अनुप्रयोगों पर गहन प्रशिक्षण दिया गया। पहले छह महीनों में प्रतिभागियों को सी-डैक, नोएडा स्थित अत्याधुनिक ई-खिलौना प्रयोगशाला में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ, जहाँ उन्होंने खिलौनों के तकनीकी घटकों, माइक्रोकंट्रोलर प्रोग्रामिंग, सर्किट डिज़ाइन और इंटरैक्टिव मॉड्यूल डेवलपमेंट पर काम किया। अगले छह महीनों में उन्हें उद्योग की वास्तविक जरूरतों के अनुसार स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के प्रोटोटाइप विकसित करने का कार्य सौंपा गया।

मंत्रालय ने इस प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को ₹25,000 की मासिक वृति देकर आर्थिक सहयोग भी सुनिश्चित किया ताकि वे बिना किसी बाधा के अपना प्रशिक्षण पूरा कर सकें। यह पहली बार है जब भारतीय सरकारी प्रणाली ने इलेक्ट्रॉनिक खिलौना क्षेत्र के लिए इतनी संरचित व सुदृढ़ तकनीकी पहल शुरू की है।

दीक्षांत समारोह में अपर सचिव अमितेश कुमार सिन्हा ने कहा कि यह कार्यक्रम न केवल कौशल विकास का साधन है, बल्कि यह सामाजिक न्याय और आर्थिक समावेशन का भी प्रतीक है। उन्होंने बताया कि SC/ST और पूर्वोत्तर क्षेत्र के युवाओं में तकनीकी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और उचित अवसर मिलने पर वे वैश्विक स्तर पर भी अपना योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों की मांग तेजी से बढ़ रही है और भारत धीरे-धीरे इस क्षेत्र में वैश्विक खिलाड़ी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

दीक्षांत समारोह में सी-डैक के कार्यकारी निदेशक विवेक खनेजा, मंत्रालय की जीसी आर एंड डी सुनीता वर्मा, इंडियन टॉय इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रतिनिधि और लेगो समूह के विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। सभी ने प्रशिक्षु इंजीनियरों द्वारा तैयार किए गए नवाचारी परियोजनाओं की सराहना की और कहा कि यह कार्यक्रम भारत के तकनीकी भविष्य की मजबूत नींव रखता है।

इस 1-वर्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ने न केवल युवाओं को तकनीकी दक्षता प्रदान की, बल्कि उन्हें खिलौना उद्योग में स्टार्टअप और उद्यमिता के नए अवसर भी उपलब्ध कराए। यह पहल देश की सामाजिक और तकनीकी प्रगति दोनों को एक साथ आगे बढ़ाने का आदर्श मॉडल बनकर उभर रही है।