राजनाथ सिंह ने नागरिक सेवकों से सुरक्षा–शासन समन्वय के साथ विकसित भारत निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान

Sat 29-Nov-2025,06:17 PM IST +05:30

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राजनाथ सिंह ने नागरिक सेवकों से सुरक्षा–शासन समन्वय के साथ विकसित भारत निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान rajnath-singh-civil-servants-governance-security-lbsnaa
  • राजनाथ सिंह ने नागरिक सेवकों से राष्ट्रीय सुरक्षा और शासन के बीच सुदृढ़ समन्वय स्थापित कर विकसित भारत के लक्ष्य को गति देने का आह्वान किया।

  • ऑपरेशन सिंदूर को नागरिक-सैन्य सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए रक्षामंत्री ने प्रशासनिक तंत्र की जन-सूचना और मॉक ड्रिल भूमिका की सराहना की।

  • तकनीक आधारित प्रशासन, पारदर्शिता, समावेशिता और जन-पहुंच बढ़ाने पर जोर देते हुए नागरिक सेवकों से नवोन्मेषी कार्यप्रणालियों को अपनाने की अपील की गई।

Uttarakhand / Mussoorie :

उत्तराखंड/ रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि युवा नागरिक सेवकों की भूमिका केवल प्रशासनिक कुशलता तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा और चुनौतीपूर्ण स्थितियों का सामना करने में भी उनकी समान भागीदारी अपेक्षित है। वे 29 नवंबर 2025 को उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में आयोजित 100वें कॉमन फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” नागरिक-सैन्य समन्वय का अनुपम उदाहरण है, जहां प्रशासनिक अधिकारियों ने सशस्त्र बलों के साथ मिलकर सूचना संचार, जन-जागरूकता और मॉक ड्रिल के माध्यम से जनता का विश्वास बनाए रखा। उन्होंने बताया कि इस अभियान में भारतीय सेनाओं ने संतुलित एवं संयमित प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान और पीओके क्षेत्र में स्थित आतंकी ढांचों को पूरी सफलता के साथ निशाना बनाया, लेकिन पड़ोसी देश की निरंतर उकसावे की नीति के कारण सीमा परिस्थिति सामान्य नहीं हो सकी।

रक्षामंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य तभी संभव है जब शासन तंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ तथा ‘सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन’ के मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और आने वाले दो से तीन वर्षों में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। उन्होंने प्रशासनिक प्रशिक्षुओं से कहा कि वे आदर्शवादी प्रहरी ही नहीं, बल्कि ‘‘लोगों के सेवक और सशक्तिकरण के सूत्रधार’’ बने रहें।

श्री सिंह ने नव-नियुक्त अधिकारियों को तकनीक आधारित समाधान को अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि प्रशासन को पारदर्शिता, जन-पहुंच और समावेशिता बढ़ाने के लिए डिजिटल नवाचारों का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, जन-धन योजना, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और फेसलेस टैक्स असेसमेंट जैसे सरकारी अभियानों के प्रभावी परिणामों को उदाहरण के रूप में पेश किया। उन्होंने रक्षा मंत्रालय की “संपूर्ण” पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एआई-संचालित प्रणाली रक्षा खरीद एवं भुगतान प्रक्रियाओं को पारदर्शिता और दक्षता के साथ प्रबंधित कर रही है।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने नागरिक सेवकों में संवेदनशीलता और करुणा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जब अधिकारी समाज के कमजोर वर्गों से संवाद करते हैं, तो उन्हें यह समझना चाहिए कि उनकी चुनौतियां केवल व्यक्तिगत स्तर की नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित होती हैं। उन्होंने सिविल सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2047 तक कई महिलाएं कैबिनेट सचिवों के पद तक पहुंचेंगी और भारत की विकास गाथा में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगी।

अंत में उन्होंने कहा कि फाउंडेशन कोर्स केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि एक सक्षम, दक्ष और संवेदनशील शासन प्रणाली तैयार करने की प्रतिबद्धता है। समारोह से पूर्व उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की तथा अकादमी प्रांगण में ओडीओपी मंडप का भी उद्घाटन किया।