काशी तमिल संगमम् 4.0 की शुरुआत, पहला छात्र दल वाराणसी रवाना — सांस्कृतिक समागम को नई ऊर्जा
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केटीएस 4.0 के पहले छात्र दल के रवाना होने से तमिलनाडु और काशी के बीच सांस्कृतिक सेतु को नई ऊर्जा और व्यापक स्वरूप मिला।
वाराणसी में छात्रों के लिए सांस्कृतिक भ्रमण, सेमिनार, संवाद सत्र, आध्यात्मिक स्थलों और तमिल विरासत से जुड़े कार्यक्रम आयोजित होंगे।
'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना के तहत शिक्षा मंत्रालय की यह पहल युवाओं में राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समझ को मजबूत करती है।
वाराणसी/ कन्याकुमारी — काशी तमिल संगमम् (केटीएस) 4.0 की शुरुआत आज उस समय ऐतिहासिक और उत्साहपूर्ण माहौल के साथ दर्ज हुई, जब छात्रों का पहला दल सुबह 11:45 बजे ट्रेन संख्या 06001 से कन्याकुमारी से वाराणसी के लिए रवाना हुआ। इस ट्रेन में कन्याकुमारी से 43 छात्र शामिल हुए, जबकि तिरुचिरापल्ली (टीपीजे) से 86 और चेन्नई एग्मोर (एमएस) से 87 छात्र बाद में दल का हिस्सा बनेंगे। यात्रा की यह जोशीली शुरुआत दक्षिण और उत्तर भारत के बीच सांस्कृतिक संवाद और सदियों पुराने सभ्यतागत रिश्तों को फिर से मजबूती देने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस दल में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के छात्र शामिल हैं, जिन्हें वाराणसी में आयोजित सांस्कृतिक, शैक्षिक और अनुभवात्मक गतिविधियों के माध्यम से काशी और तमिल सभ्यता तथा उनके आध्यात्मिक जुड़ाव को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलेगा। केटीएस 4.0 के व्यापक कार्यक्रम के तहत तमिलनाडु से लगभग 1400 प्रतिनिधियों को उत्तर भारत के महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों का भ्रमण कराया जाएगा। इस वर्ष केटीएस का चौथा संस्करण शिक्षा मंत्रालय द्वारा 2 दिसंबर 2025 से आयोजित किया जा रहा है।
वाराणसी प्रवास के दौरान छात्र गंगा घाटों, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थलों, स्थानीय समुदायों तथा शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। इससे उन्हें उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक धरोहर, भाषा, जीवन दर्शन और परंपराओं के बीच गहन संबंधों का अनुभव प्राप्त होगा। यात्रा के दौरान छात्रों के लिए सेमिनार, संवाद-सत्र, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, साहित्यिक चर्चाएं, स्थानीय व्यंजनों और हस्तशिल्प के परिचय जैसी विविध गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।
कार्यक्रम के अंतर्गत तमिल विरासत से जुड़े काशी के ऐतिहासिक स्थलों का विशेष भ्रमण भी शामिल है। छात्रों को महाकवि सुब्रह्मण्य भारती के पैतृक निवास, काशी मदम, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और माता अन्नपूर्णा मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे, ताकि तमिल संस्कृति और काशी के आध्यात्मिक इतिहास के निकट संबंधों को गहराई से समझा जा सके।
यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विज़न को आगे बढ़ाते हुए तमिलनाडु और उत्तर भारत के बीच सभ्यता, संस्कृति और जन-भावनाओं के सेतु को और मजबूत बनाती है। केटीएस 4.0 का आयोजन शिक्षा मंत्रालय के तहत आईआईटी मद्रास और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के समन्वय से किया जा रहा है, जिसमें संस्कृति, सूचना एवं प्रसारण, पर्यटन, कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, एमएसएमई, कौशल विकास सहित कई मंत्रालय और उत्तर प्रदेश सरकार भी सहयोग कर रहे हैं।
विद्यार्थी आदान-प्रदान पर आधारित यह कार्यक्रम युवाओं में राष्ट्रीय एकता, सहभागिता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता की भावना को विकसित करता है। यह पहल 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के विज़न को धरातल पर उतारते हुए भारत के दोनों छोरों को भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से जोड़ती है।