भारत बना दुनिया का सबसे सफल HIV नियंत्रण मॉडल, एड्स मृत्यु दर में 81% की ऐतिहासिक गिरावट
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भारत ने 2010 से 2024 के बीच एड्स से होने वाली मौतों में 81% की उल्लेखनीय कमी दर्ज कर वैश्विक मानकों को पीछे छोड़ दिया। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के पाँच चरणों ने रोकथाम, परीक्षण, मुफ्त उपचार और समुदाय आधारित भागीदारी को मजबूत कर HIV प्रतिक्रिया को विश्व स्तर पर मॉडल बनाया।
भारत द्वारा 70% वैश्विक जेनेरिक ARV दवाओं की आपूर्ति विश्वभर में HIV उपचार को सुलभ और किफायती बनाने में अहम योगदान देती है।
नई दिल्ली / भारत ने HIV/AIDS नियंत्रण में विश्व स्तर पर एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसे आज वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियाँ "सबसे सफल सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान" की श्रेणी में रख रही हैं। यूनएड्स और डब्ल्यूएचओ की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में बार-बार यह स्वीकार किया गया है कि भारत ने न केवल संक्रमण दर को कम किया, बल्कि एड्स से होने वाली मौतों को 81% तक घटाने का अभूतपूर्व रिकॉर्ड बनाया है।
2010 में जहाँ भारत में HIV/AIDS से 1.73 लाख मौतें दर्ज की गई थीं, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर सिर्फ 32,200 रह गई। यह न केवल भारत की स्वास्थ्य नीति की मजबूती को दर्शाता है बल्कि वैश्विक औसत की तुलना में भारत की प्रगति कहीं अधिक तेज़ रही है। विश्वभर में वर्ष 2024 में एड्स से 6.3 लाख मौतें दर्ज की गईं लेकिन भारत का योगदान केवल 5% रहा, जो इस बीमारी के खिलाफ भारत की प्रभावशाली लड़ाई को दर्शाता है।
भारत के इस असाधारण प्रदर्शन के पीछे राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) की पाँच चरणों वाली रणनीति है। 1992 में शुरू हुआ यह कार्यक्रम समय के साथ जागरूकता, रोकथाम, परीक्षण, उपचार और समुदाय-आधारित हस्तक्षेपों पर केन्द्रित होकर और मज़बूत हुआ। 2017 में लागू HIV/AIDS (Prevention & Control) Act ने पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा कर भेदभाव-मुक्त वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सरकार द्वारा ‘Test & Treat’ नीति लागू करने से HIV की पुष्टि होते ही उपचार शुरू किया जाता है, जिससे संक्रमण एड्स में बदलने से पहले ही नियंत्रित हो जाता है। इसके साथ ही भारत वैश्विक स्तर पर 70% किफायती जेनेरिक ARV दवाओं की आपूर्ति कर रहा है, जिससे दुनिया के अन्य देशों में भी उपचार व्यापक रूप से उपलब्ध हुआ है। भारत में HIV के साथ रहने वाले लगभग 18 लाख मरीजों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) उपलब्ध कराई जा रही है। ART रिटेंशन 94% और वायरल सप्रेशन 97% तक पहुँचना यह दिखाता है कि भारत न केवल उपचार दे रहा है, बल्कि मरीजों को लंबी अवधि तक निगरानी में भी रख रहा है।
NACP-V (2021–2026) के तहत, भारत 2030 तक इस महामारी को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उच्च जोखिम वाले समूहों, किशोरों, महिलाओं और जेलों जैसी चुनौतीपूर्ण आबादियों के लिए विशेष कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। विश्व एड्स दिवस 2025 का थीम ‘व्यवधान पर विजय, एड्स प्रत्युत्तर में सुधार’ भारत की नीतियों और उपलब्धियों के साथ पूर्णतः मेल खाता है, क्योंकि भारत ने महामारी, संघर्ष और असमानताओं जैसी चुनौतियों के बावजूद HIV सेवाओं को लगातार बेहतर बनाया है। भारत का HIV/AIDS नियंत्रण अब "चुनौती से अवसर बनाने" का प्रतीक बन चुका है। यह मॉडल अन्य देशों के लिए एक प्रेरक मार्गदर्शिका की तरह उभरा है।