भारत में पहली हाई-टेक ई-खिलौना लैब शुरू, स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक खिलौना उद्योग को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
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भारत ने सी-डैक नोएडा में अपनी पहली ई-खिलौना लैब शुरू की। यह स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक खिलौना उद्योग को एआई, रोबोटिक्स और प्रोटोटाइप निर्माण में बड़ी तकनीकी ताकत देगी।
इस परियोजना के तहत अनुसूचित जाति, जनजाति और पूर्वोत्तर क्षेत्र के युवाओं को एक वर्ष का विशेष प्रशिक्षण और 25,000 रुपये मासिक वृति दी गई। ई-खिलौना लैब भविष्य में एआई, रोबोटिक्स, सेंसर टेक्नोलॉजी और आईओटी आधारित खिलौनों के विकास के लिए भारत का प्रमुख अनुसंधान केंद्र बनेगी।
नई दिल्ली / इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा भारत में स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक खिलौना उद्योग को तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मंत्रालय ने सी-डैक, नोएडा में अत्याधुनिक “ई-खिलौना प्रयोगशाला” (E-Toy Lab) का शुभारंभ किया, जो देश में भविष्य के इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के प्रोटोटाइप, डिज़ाइन, टेस्टिंग और नवाचार का मुख्य केंद्र बनेगी। इस लैब का उद्घाटन मंत्रालय के अपर सचिव अमितेश कुमार सिन्हा ने 29 नवंबर को इंजीनियरों के दूसरे बैच के दीक्षांत समारोह के दौरान किया।
यह प्रयोगशाला मंत्रालय की विशेष परियोजना “इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी बेस्ड कंट्रोल एंड ऑटोमेशन सॉल्यूशन फॉर टॉय इंडस्ट्री” का हिस्सा है। इसका उद्देश्य भारतीय खिलौना उद्योग को विदेशों पर निर्भरता कम करते हुए अपने स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के निर्माण में सक्षम बनाना है। इस लैब में भविष्य में एआई, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स, सेंसर टेक्नोलॉजी और आईओटी आधारित खिलौनों पर रिसर्च के साथ-साथ स्टार्टअप को भी तकनीकी सहायता दी जाएगी।
मंत्रालय ने पूरे भारत से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पूर्वोत्तर क्षेत्र के 18 प्रतिभाशाली युवा इंजीनियरों को चयनित करके एक वर्ष का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया। पहले छह महीनों में प्रतिभागियों ने सी-डैक-नोएडा की ई-खिलौना लैब में रिसर्च और प्रयोगों पर कार्य किया, जबकि अगले छह महीनों में उद्योग की जरूरतों के अनुसार खिलौनों के प्रोटोटाइप तैयार किए। प्रशिक्षुओं को कार्यक्रम अवधि में ₹25,000 मासिक वृति भी प्रदान की गई।
अपर सचिव अमितेश कुमार सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि भारत इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के विशाल बाजार के रूप में उभर रहा है और जल्द ही वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर सकता है। उन्होंने बताया कि ई-खिलौना उत्कृष्टता केंद्र में मेनफ्रेम सपोर्ट हब (MSH), NIELIT और खिलौना उद्योग से जुड़े अन्य संस्थान भी शामिल किए जाएंगे। इससे उद्यमिता और स्टार्टअप को नए अवसर प्राप्त होंगे।
दीक्षांत समारोह में सी-डैक के ईडी विवेक खनेजा, मंत्रालय की जीसी आर एंड डी सुनीता वर्मा, इंडियन टॉय एसोसिएशन के निदेशक अनिर्बान गुप्ता और लेगो समूह के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने प्रशिक्षित छात्रों के प्रोजेक्ट देखे और उन्हें उद्योग में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस नई ई-खिलौना प्रयोगशाला के माध्यम से भारत न केवल विदेशी खिलौनों पर निर्भरता घटाएगा, बल्कि बच्चों के लिए विश्व स्तरीय सुरक्षित एवं नवाचारयुक्त इलेक्ट्रॉनिक खिलौने विकसित करने में भी सक्षम बनेगा।