नवयुग खादी फैशन शो में आधुनिक खादी का नया रूप, कारीगरों की शक्ति का दिखा जलवा

Sun 30-Nov-2025,10:31 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

नवयुग खादी फैशन शो में आधुनिक खादी का नया रूप, कारीगरों की शक्ति का दिखा जलवा
  • नवयुग खादी फैशन शो में भारत की आधुनिक खादी, कारीगरों की भूमिका और पारंपरिक बुनाई को नए रूप में प्रस्तुत किया गया। KVIC ने खादी के भविष्य की दिशा दिखाई।

  • प्रदर्शनी 3 दिसंबर तक चलेगी, जिसमें प्राकृतिक रंगाई, हाथ-कताई और डिजाइन आधारित कार्यशालाओं के साथ देशभर के खादी संस्थानों के उत्पाद प्रदर्शित होंगे।

Delhi / New Delhi :

नई दिल्ली, प्रगति मैदान खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) द्वारा आयोजित “नवयुग खादी फैशन शो” ने शनिवार को राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी, प्रगति मैदान में देश को एक नई और आधुनिक खादी का रूप दिखाया। इस आयोजन ने न केवल खादी की पारंपरिक शिल्पकला को आगे बढ़ाया, बल्कि इसे आधुनिक फैशन, युवा पसंद और वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रस्तुत किया।

28 नवंबर को प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ, जिसमें खादी ज्ञान पोर्टल (खंड II) का लोकार्पण भी किया गया। फैशन शो में प्रस्तुत सभी परिधान, डिज़ाइन और हस्तशिल्प देशभर के खादी संस्थानों और कारीगरों द्वारा तैयार किए गए थे। यह पहली बार था जब एक समर्पित डिज़ाइनर टीम ने पूरे भारत की विविध क्षेत्रीय खादी शैलियों को एक मंच पर एकीकृत रूप में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि KVIC अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि “खादी की असली ताकत उसके कारीगरों में है”। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खादी को पुनर्जीवित करने वाली पहल की सराहना करते हुए बताया कि आज की खादी केवल गाँवों तक सीमित नहीं, बल्कि फैशन, लाइफस्टाइल और वैश्विक पहचान का एक प्रमुख प्रतीक बन चुकी है।

शो में ओडिशा के इक्‍कत, असम के एरी सिल्क, गुजरात के तंगालिया, कर्नाटक के रेशम, बंगाल के सूती, तेलंगाना और बिहार की पारंपरिक बुनाई सहित देश की विविध कलाओं को एक मंच पर पेश किया गया। विशेष क्षण तब आया जब देशभर के कारीगर स्वयं रैंप पर उतरे उनके साथ KVIC अध्यक्ष मनोज कुमार भी वॉक करते दिखाई दिए, जिससे “गाँव से ग्लैमर तक” का संदेश और प्रबल हुआ।

यह आयोजन KVIC, खादी उत्कृष्टता केंद्र (COEK), NIFT और FDCI के संयुक्त प्रयास से आयोजित हुआ। कार्यक्रम 3 दिसंबर 2025 तक चलेगा, जिसमें लाइव डेमो, बिक्री स्टॉल और प्राकृतिक रंगाई, हाथ-कताई, साड़ी ड्रेपिंग जैसी कार्यशालाएँ भी आयोजित की जाएंगी। इस प्रदर्शनी का लक्ष्य खादी को “नए भारत की नई खादी” के रूप में स्थापित कर वैश्विक स्तर पर उसकी पहचान को मजबूत करना है।