उत्तराखंड में 6 नए मौसम रडार, भारत की आपदा तैयारी पर डॉ. जितेंद्र सिंह का बड़ा बयान

Sun 30-Nov-2025,10:13 PM IST +05:30

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उत्तराखंड में 6 नए मौसम रडार, भारत की आपदा तैयारी पर डॉ. जितेंद्र सिंह का बड़ा बयान
  • भारत सरकार उत्तराखंड में छह नए मौसम रडार और 33 वेधशालाओं के साथ हिमालयी क्षेत्र की वास्तविक समय आपदा पूर्वानुमान क्षमता को तेज़ी से बढ़ा रही है।

  • डॉ. जितेंद्र सिंह ने विश्व शिखर सम्मेलन में बादल फटना, ग्लेशियर पिघलना और अचानक बाढ़ की घटनाओं को देखते हुए कड़े प्रशासनिक अनुपालन की जरूरत बताई।

  • भारत का विस्तारित मौसम नेटवर्क, हिमालयी जलवायु अध्ययन कार्यक्रम और स्टार्टअप आधारित आपदा-प्रबंधन मॉडल उत्तराखंड को वैश्विक आपदा चर्चा का प्रमुख केंद्र बना रहा है।

Uttarakhand / Dehradun :

देहरादून/ डॉ. जितेंद्र सिंह ने देहरादून में आयोजित ‘आपदा प्रबंधन पर विश्व शिखर सम्मेलन’ में भारत की मजबूत आपदा-तैयारी और हिमालयी राज्यों के लिए विकसित हो रहे मौसम-पूर्वानुमान तंत्र को देश के भविष्य की सुरक्षा का आधार बताया। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में सुरकंडा देवी, मुक्तेश्वर और लैंसडाउन में तीन आधुनिक मौसम रडार पहले से कार्यरत हैं, जबकि हरिद्वार, पंतनगर और औली में जल्द ही तीन और रडार जोड़े जाएंगे, जिससे राज्य की रियल-टाइम मौसम निगरानी क्षमता और मज़बूत होगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अपनी भौगोलिक संवेदनशीलता, हिमालयी पारिस्थितििकी और हाल के वर्षों में बढ़ती जल-जलवायु आपदाओं के कारण वैश्विक आपदा-विमर्श के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। उन्होंने 2013 केदारनाथ आपदा से लेकर 2021 की चमोली त्रासदी तक कई उदाहरण देते हुए बताया कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों का पिघलना, बादल फटना और तेज़ी से बढ़ती अचानक बाढ़ की घटनाएं जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों को दर्शाती हैं।

डॉ. सिंह ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने पिछले दशक में उत्तराखंड में 33 मौसम वेधशालाएं, 142 स्वचालित मौसम स्टेशन (AWS), 107 रेन गेज, रेडियो-सोंडे एवं रेडियो-विंड सिस्टम स्थापित कर दिए हैं। यह व्यवस्था आपदा-पूर्व चेतावनी और मौसम पूर्वानुमान को अत्याधुनिक बनाती है। उन्होंने कहा कि भारत अब हिमालयी जलवायु अध्ययन कार्यक्रम के तहत बादल फटने की स्थितियों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर समय रहते चेतावनी जारी की जा सके।

केंद्रीय मंत्री ने आपदा चेतावनी के अनुपालन की कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रशासन को मौसम विभाग के अलर्ट को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में एक आईएएस अधिकारी द्वारा रेड अलर्ट पर तुरंत हाईवे बंद कर बड़ी दुर्घटना टालने का उदाहरण दिया। उन्होंने चेताया कि हिमालयी राज्यों में अवैध खनन, नदी तल में अतिक्रमण और ढलानों पर असंगत निर्माण भविष्य में गंभीर आपदाओं को जन्म दे सकते हैं।

डॉ. सिंह ने कृषि-स्टार्टअप, CSIR मॉडल और हिमालयी संसाधनों के मूल्यवर्धन को क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का नया आधार बताते हुए कहा कि भारत अब पड़ोसी देशों को भी आपदा-प्रबंधन तकनीक और पूर्वानुमान सेवाएं निर्यात कर रहा है। उन्होंने कहा कि आपदा शमन और जलवायु अनुकूलन ही सतत आर्थिक विकास की असली रीढ़ हैं।

अंत में, उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आयोजन समिति को धन्यवाद देते हुए कहा कि उत्तराखंड से मिलने वाली यह वैश्विक अंतर्दृष्टि आने वाले वर्षों में दुनिया भर के आपदा-तंत्र को नई दिशा देगी।