मानेसर चिंतन शिविर में लागत सुधार, AI शासन और सार्वजनिक वित्त नवाचारों पर बनी सहमति
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चिंतन शिविर में सार्वजनिक वित्त प्रबंधन, लागत निर्धारण, AI-ML आधारित प्रशासनिक दक्षता और वैश्विक सहयोग मॉडल पर गहन विचार-विमर्श कर सुधार के नए आयाम तलाशे गए।
नई दिल्ली / हरियाणा के मानेसर में वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (DOE) के मुख्य सलाहकार लागत कार्यालय द्वारा 28 से 30 नवंबर तक हरियाणा के मानेसर में आयोजित तीन दिवसीय चिंतन शिविर का आज सफल समापन हुआ। इस शिविर में केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार और स्वर्ण जयंती हरियाणा राजकोषीय प्रबंधन संस्थान के विशेषज्ञों ने भाग लेकर सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन के बदलते स्वरूप पर व्यापक मंथन किया।
शिविर की शुरुआत मुख्य लागत सलाहकार श्री पवन कुमार के संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने समकालीन लोक प्रशासन में निरंतर सीखने, नवाचार और तकनीकी दक्षता की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद हार्टफुलनेस फाउंडेशन की डॉ. गौरी रंगरा ने "हार्टफुलनेस संचार" पर सत्र लेकर नेतृत्व में सहानुभूति और पारदर्शिता का महत्व रेखांकित किया।
पहले दिन के सत्र में दो मुख्य मुद्दों -अंतर्राष्ट्रीय ज्ञान निकाय का विकास और नगरपालिका सेवाओं के लिए मानकीकृत लागत निर्धारण — पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए गए। शिक्षा विभाग के सचिव श्री वी. वुअलनम ने एक नोडल प्रकोष्ठ स्थापित करने का सुझाव दिया, जो वैश्विक संस्थानों के साथ मिलकर नगर निकायों के लिए लागत निर्धारण मानकों को सुदृढ़ करेगा।
दूसरे दिन की शुरुआत योग सत्र से हुई। इसके बाद तकनीकी एवं अकादमिक विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए:
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आईआईआईटी सूरत के निदेशक राजीव शौरी ने प्रशासन में AI-ML के उपयोग से दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया।
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आईआईसीए के प्रो. नवीन सिरोही ने कॉर्पोरेट प्रशासन और हितधारक जुड़ाव रणनीतियों पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए।
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एमडीआई गुड़गांव के प्रो. संदीप गोयल ने फोरेंसिक अकाउंटिंग और वित्तीय सतर्कता तंत्र की मजबूती को आवश्यक बताया।
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आईएसबी हैदराबाद के प्रो. ऋषभ अग्रवाल ने सार्वजनिक डेटा और AI को सार्वजनिक वस्तुओं के रूप में उपयोग करने और समतामूलक उपयोगकर्ता-शुल्क ढांचे पर चर्चा की।
गोलमेज चर्चाओं में न्यायसंगत मूल्य निर्धारण मॉडल, उपयोगकर्ता-शुल्क ढांचे और कॉर्पोरेट प्रशासन में भारतीय लागत लेखा सेवा की भूमिका पर विचार-विमर्श हुआ। अंतिम दिन “व्यावसायिक विकास और वृद्धि के नए रास्ते” विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। समापन भाषण में मुख्य लागत सलाहकार ने प्रतिभागियों की विश्लेषणात्मक क्षमता और राजकोषीय प्रशासन को सुदृढ़ बनाने के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम का समापन अतिरिक्त मुख्य सलाहकार लागत श्री मनमोहन सचदेवा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।