Delhi Dust Audit: सीएक्यूएम के 26 उड़न दस्तों ने दिल्ली में 321 सड़कों का निरीक्षण किया, एमसीडी को सफाई अभियान तेज़ करने के निर्देश
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सीएक्यूएम के 26 उड़न दस्तों ने दिल्ली में धूल नियंत्रण उपायों की जाँच के लिए 321 सड़कों का निरीक्षण कर एजेंसियों के प्रदर्शन का विस्तृत मूल्यांकन किया। निरीक्षण में एमसीडी क्षेत्रों में अधिक धूल वाले हिस्से मिले, जबकि एनडीएमसी और सीपीडब्ल्यूडी ने तुलनात्मक रूप से बेहतर सफाई और नियंत्रण उपाय प्रदर्शित किए।
नई दिल्ली / एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन को मज़बूत करने के लिए सीएक्यूएम द्वारा चलाए गए विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत 29 नवंबर को दिल्ली के विभिन्न इलाकों में धूल स्तर का गहन निरीक्षण किया गया। इस अभियान में सीएक्यूएम के 26 उड़न दस्तों ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के क्षेत्राधिकार वाली कुल 321 सड़क खंडों की जाँच की।
निरीक्षण के दौरान जियो-टैग्ड और टाइम-स्टैम्प्ड प्रमाण इकट्ठा किए गए, जिन्हें आयोग को रिपोर्ट के रूप में सौंपा गया। आंकड़ों में पाया गया कि 35 हिस्सों में धूल की उच्च मात्रा, 61 में मध्यम, 94 में कम और 131 हिस्सों में धूल बिल्कुल नहीं थी। एमसीडी के अंतर्गत आने वाली 182 सड़कों में से 35 हिस्सों में धूल की उच्च तीव्रता पाई गई, जो दर्शाता है कि एमसीडी को अपनी यांत्रिक सफाई और धूल-निरोधक उपायों को और तेज़ करने की आवश्यकता है।
इसके उलट, एनडीएमसी ने उल्लेखनीय रूप से बेहतर प्रदर्शन दिखाया। 133 निरीक्षित सड़कों में से 100 सड़कों पर धूल नहीं मिली, और कोई भी खंड उच्च धूल श्रेणी में नहीं आया।
सीपीडब्ल्यूडी की 6 सड़कों के निरीक्षण में भी कोई उच्च धूल स्तर नहीं दर्ज हुआ, जबकि 4 सड़कों पर धूल नहीं मिली और 2 पर मध्यम स्तर दर्ज किया गया। आयोग ने कहा कि दिल्ली में सड़क धूल, खासतौर पर सर्दियों में, कणीय प्रदूषण का प्रमुख कारण बनी रहती है। इसलिए निरंतर यांत्रिक सफाई, धूल का उचित निपटान, फुटपाथों का रखरखाव और नियमित पानी छिड़काव जैसे उपाय अनिवार्य हैं।
एमसीडी को विशेष रूप से कहा गया कि धूल प्रभावित इलाकों की संख्या अधिक है, इसलिए सफाई अभियान को तेज़ किया जाए और धूल नियंत्रण मानकों के पालन को कड़ाई से सुनिश्चित किया जाए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन क्लीन एयर के तहत ऐसे निरीक्षण आगे भी जारी रहेंगे ताकि दिल्ली की सड़कें अधिक स्वच्छ, धूल-रहित और वायु गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनाई जा सकें।