Nagpur Book Fest : भारत का ‘राष्ट्र’ पश्चिम से अलग, विवाद हमारा स्वभाव नहीं- RSS प्रमुख मोहन भागवत
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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर राष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव में कहा कि भारत की राष्ट्र अवधारणा पश्चिमी राष्ट्रवाद से अलग है और सह-अस्तित्व पर आधारित है।
भागवत ने विविधता को भारत की शक्ति बताया और कहा कि धर्म, भाषा और परंपराओं के अंतर के बावजूद देश एक परिवार की तरह जुड़े रहने की क्षमता रखता है।
AI और वैश्वीकरण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक मानवता की सेवा का साधन बने तथा भारत ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना से दुनिया को नया मॉडल देगा।
नागपुर/ नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव में बोलते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत की मूल प्रकृति कभी विवादों में उलझने की नहीं रही, बल्कि उसकी परंपरा हमेशा सौहार्द, समरसता और सह-अस्तित्व पर आधारित रही है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि आज के समय में लोग किसी एक राय पर टिक जाते हैं और अन्य विचारों के लिए मन में कोई स्थान नहीं छोड़ते।
भागवत ने कहा कि एक बार जब कोई विचार या राय मन में जम जाती है, तो लोग बाकी सभी विचारों को नकारने लगते हैं और उसे किसी ‘वाद’ का नाम दे देते हैं। उन्होंने कहा, “यह हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। खुला संवाद और विविध दृष्टिकोण ही भारत को अद्वितीय बनाते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि भारत की राष्ट्र की अवधारणा पश्चिम से बिल्कुल अलग है। पश्चिमी समाज राष्ट्र को एक राज्य-व्यवस्था और सरकार के ढांचे में देखते हैं, जबकि भारत में ‘राष्ट्र’ हजारों वर्षों से जीवित सांस्कृतिक चेतना के रूप में मौजूद है, चाहे शासन किसी का भी रहा हो।
भागवत के अनुसार, “हम ‘नेशनलिज्म’ नहीं, ‘नेशनलिटी’ की बात करते हैं।” उन्होंने कहा कि पश्चिम में राष्ट्रवाद के उभार ने दो विश्व युद्धों को जन्म दिया, इसलिए वहां लोग इस शब्द से डरते हैं। जबकि भारत में राष्ट्र की अवधारणा अहंकार नहीं, बल्कि आत्मीयता और प्रकृति के साथ सामंजस्य पर आधारित है। नागपुर के पुस्तक महोत्सव में युवाओं के साथ संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की विविधता कोई बाधा नहीं, बल्कि हमारी ताकत है। धर्म, भाषा, भोजन, परंपराओं और राज्यों की भिन्नता के बावजूद भारतीय समाज हमेशा एक परिवार की तरह साथ चलता आया है।
उन्होंने कहा, “हम सब भारत माता की संतान हैं। यही हमारी एकता का वास्तविक आधार है।” तकनीक और AI पर बात करते हुए भागवत ने स्पष्ट किया कि तकनीकी विकास को रोका नहीं जा सकता। “कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारा साधन होनी चाहिए, हमारा स्वामी नहीं,” उन्होंने कहा। भागवत ने जोर दिया कि AI का उपयोग मानव कल्याण, जीवन गुणवत्ता और नैतिक विकास के लिए होना चाहिए। असली संतोष इंसान को तभी मिलता है जब वह दूसरों की सहायता करता है न कि केवल अस्थायी सफलता से।
वैश्वीकरण पर उन्होंने कहा कि भारत में ‘वैश्विक परिवार’ की अवधारणा सदियों से रही है, जिसे ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ कहा जाता है। उन्होंने कहा, “हम वैश्विक बाजार नहीं, वैश्विक परिवार बनाएंगे यही असली वैश्वीकरण होगा।”