पंजाब में दशकों बाद आई भीषण बाढ़, 1,018 गांव प्रभावित, 23 लोगों की मौत
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पंजाब बाढ़ 2025: 1,018 गांव जलमग्न और 23 लोगों की मौत.
सेना, बीएसएफ, एनडीआरएफ द्वारा राहत व बचाव कार्य जारी.
अमृतसर, गुरदासपुर, पठानकोट और कपूरथला सबसे ज्यादा प्रभावित.
Amritsar / पंजाब इस समय प्राकृतिक आपदा की गंभीर मार झेल रहा है। दशकों बाद आई इस भीषण बाढ़ ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन और कपूरथला समेत कई जिलों में नदियां और नहरें उफान पर हैं। परिणामस्वरूप सैकड़ों गांव जलमग्न हो गए हैं और लाखों एकड़ कृषि भूमि पानी में डूब गई है। अब तक हजारों लोग अपने घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं।
राहत और बचाव कार्य तेज़ी पर
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना, बीएसएफ, एनडीआरएफ और पुलिस के जवान लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। अब तक 16,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है, जबकि कई परिवार अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा को राहत कार्य और अधिक तेज़ी से चलाने के निर्देश दिए हैं।
बांधों और नदियों का बढ़ा जलस्तर
पौंग और भाखड़ा बांध खतरे के निशान से ऊपर बह रहे हैं। रावी नदी में 14.11 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। गुरदासपुर के धरमकोट में रावी का जलस्तर अभी भी 4.60 लाख क्यूसेक पर है, जो खतरे के स्तर से ऊपर है। जिले के 323 गांव और पठानकोट के 81 गांव गंभीर रूप से प्रभावित हैं। अमृतसर के अजनाला इलाके में भी पानी फैलने से लगभग 15 गांव संकट में हैं।
मौतों का आंकड़ा और प्रभावित जिले
अब तक बाढ़ से 23 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इनमें सबसे अधिक 8 मौतें पठानकोट से दर्ज की गई हैं। होशियारपुर में 7, रूपनगर और बरनाला में 3-3 तथा गुरदासपुर में 2 लोगों की जान गई है। बरनाला की तीन मौतें भारी बारिश की वजह से हुईं, जबकि बाकी लोग अपने घर बह जाने या तेज़ धाराओं में फंसने से मारे गए।
सरकार और नेताओं की सक्रियता
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को आठ गंभीर रूप से प्रभावित जिलों—गुरदासपुर, पठानकोट, अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, होशियारपुर, फिरोजपुर और फाज़िल्का की स्थिति की समीक्षा की। सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो सेना, बीएसएफ, वायुसेना और एनडीआरएफ द्वारा चलाए जा रहे राहत व बचाव कार्यों की निगरानी करेगी।
राजनीतिक दलों के नेता भी प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी से राघव चड्ढा और ललजीत सिंह भुल्लर, कांग्रेस से चरणजीत सिंह चन्नी और प्रताप बाजवा, भाजपा से सुनील जाखड़ और अकाली दल से सुखबीर सिंह बादल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाकर हालात का जायजा लिया और कार्यकर्ताओं से राहत कार्यों में सक्रिय योगदान की अपील की।
नई चुनौतियां और खतरे
हालांकि रावी और ब्यास नदियों का जलस्तर घट रहा है, लेकिन घग्गर नदी की बाढ़ ने पटियाला और संगरूर जिलों को नए खतरे में डाल दिया है। सुबह भांखरपुर में पानी का स्तर 70,000 क्यूसेक दर्ज किया गया था, जो दोपहर तक कुछ घटा, लेकिन शाम तक तंगड़ी और मार्कंडा नदियों में पानी बढ़ने से प्रशासन अलर्ट पर है।
स्वास्थ्य और सुरक्षा के उपाय
सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि सरकार बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। स्वास्थ्य विभाग भी जलजनित बीमारियों को रोकने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। प्रभावित गांवों में राहत सामग्री, दवाइयाँ और स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के प्रयास जारी हैं।
निष्कर्ष
पंजाब की यह भीषण बाढ़ दशकों बाद देखने को मिली है, जिसने राज्य के 1,018 गांवों को प्रभावित किया है। अब तक 23 लोगों की मौत और लाखों लोगों का विस्थापन इस आपदा की भयावहता को दर्शाता है। राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं, लेकिन जलस्तर पूरी तरह सामान्य होने तक हालात चुनौतीपूर्ण बने रहेंगे।