राज्यसभा विदाई: पीएम मोदी बोले- लोकतंत्र की ‘ओपन यूनिवर्सिटी’

Wed 18-Mar-2026,01:41 PM IST +05:30

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राज्यसभा विदाई: पीएम मोदी बोले- लोकतंत्र की ‘ओपन यूनिवर्सिटी’ Rajya-Sabha-Farewell-PM-Modi
  • वरिष्ठ नेताओं के अनुभव को मार्गदर्शक बताते हुए पीएम ने नए सांसदों को उनसे सीखने और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने की अपील की।

  • राज्यसभा में 37 सांसदों की विदाई के दौरान पीएम मोदी ने संसदीय अनुभव को लोकतंत्र की अमूल्य विरासत बताते हुए ‘ओपन यूनिवर्सिटी’ की संज्ञा दी।

Delhi / Delhi :

Delhi/ राज्यसभा में 37 सांसदों की विदाई के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावुक संबोधन देते हुए सदन की गरिमा और परंपराओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा केवल कानून निर्माण का मंच नहीं, बल्कि यह एक “ओपन यूनिवर्सिटी” है, जहां सदस्य निरंतर सीखते और अपने अनुभवों को समृद्ध करते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यसभा में बिताए गए वर्षों का अनुभव व्यक्ति और राष्ट्र दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की वह पूंजी बताया, जो पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होती है।

अपने संबोधन में उन्होंने वरिष्ठ नेताओं जैसे एचडी देवगौड़ा, मल्लिकार्जुन खड़गे और शरद पवार के अनुभव को ‘अनमोल विरासत’ बताया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं का संसदीय ज्ञान नए सांसदों के लिए मार्गदर्शक का काम करता है और उनसे सीखना लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करता है।

प्रधानमंत्री ने नए सांसदों से अपील की कि वे वरिष्ठ सदस्यों के अनुभवों का लाभ उठाएं और अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभाएं। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में “सेकंड ओपिनियन” की अहम भूमिका होती है और राज्यसभा इसी भूमिका को निभाती है, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक संतुलित और प्रभावी बनती है। उन्होंने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि वे मृदुभाषी होते हुए भी कठिन परिस्थितियों में सदन को सुचारु रूप से संचालित करते हैं।

प्रधानमंत्री ने सदन के हल्के-फुल्के पलों और हास्य-विनोद की परंपरा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह परंपरा बहसों को जीवंत बनाती है और संवाद को सकारात्मक दिशा देती है। इस बीच, लोकसभा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी भी सामने आई, जिसमें बजट सत्र के दौरान निलंबित 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन समाप्त कर दिया गया। राज्यसभा में 37 सांसदों की विदाई लोकतंत्र की निरंतरता और संसदीय परंपराओं की मजबूती का प्रतीक बनकर सामने आई है, जहां अनुभव और संवाद भविष्य की दिशा तय करते हैं।