ईरान तेल संकट गहराया, स्टोरेज भरने के कगार पर

Mon 27-Apr-2026,05:27 PM IST +05:30

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ईरान तेल संकट गहराया, स्टोरेज भरने के कगार पर Iran-Oil-Crisis-Storage-Hormuz-Tensions
  • ईरान में तेल स्टोरेज संकट गहराया, खार्ग द्वीप की क्षमता लगभग भर चुकी, हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल जमा हो रहा।

  • अमेरिकी प्रतिबंध और होर्मुज जलडमरूमध्य तनाव से निर्यात प्रभावित, अस्थायी समाधान के तौर पर पुराने टैंकर का उपयोग किया जा रहा।

  • स्टोरेज भरने पर उत्पादन घटाने की नौबत, इससे तेल कुओं को स्थायी नुकसान और ईरान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता।

Tehran Province / Tehran :

तेहरान/ Iran इस समय गंभीर तेल संकट से जूझ रहा है, जहां अमेरिकी प्रतिबंधों और Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव ने उसके तेल निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि देश के पास कच्चा तेल स्टोर करने की जगह तेजी से खत्म होती जा रही है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र पर बड़ा दबाव बनता दिख रहा है।

ईरान का प्रमुख निर्यात केंद्र Kharg Island इस संकट का केंद्र बन गया है। देश के कुल तेल निर्यात का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा यहीं से होता है। इस द्वीप की भंडारण क्षमता लगभग 3 करोड़ बैरल है, जो अब लगभग पूरी तरह भर चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केवल 1.3 करोड़ बैरल की जगह शेष बची है, जबकि हर दिन 10 से 11 लाख बैरल कच्चा तेल जमा हो रहा है। इस गति से अगले 12 से 13 दिनों में स्टोरेज पूरी तरह भर सकता है।

स्थिति को संभालने के लिए ईरान ने अस्थायी समाधान अपनाया है। करीब 30 साल पुराने तेल टैंकर ‘नाशा’ को दोबारा सक्रिय किया गया है, जिसे अब समुद्र में फ्लोटिंग स्टोरेज के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। लंबे समय से निष्क्रिय यह टैंकर अब अतिरिक्त कच्चा तेल रखने का सहारा बन गया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे स्थायी समाधान नहीं मानते।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्टोरेज पूरी तरह भर गया, तो ईरान को अपने तेल उत्पादन में कटौती करनी पड़ सकती है। खासकर वे तेल कुएं, जहां पानी इंजेक्शन तकनीक का इस्तेमाल होता है, उनके बंद होने से स्थायी नुकसान हो सकता है और उत्पादन में लंबे समय तक गिरावट आ सकती है।

तेल निर्यात ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन मौजूदा संकट ने उसकी आय पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। निर्यात में कमी और स्टोरेज संकट के कारण देश की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो सकती है।

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी प्रतिबंध और समुद्री दबाव अब केवल रणनीतिक कदम नहीं, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करने का साधन बन चुके हैं।

यदि जल्द ही निर्यात में सुधार नहीं हुआ, तो ईरान को उत्पादन घटाने या अपने तेल क्षेत्रों को दीर्घकालिक नुकसान का जोखिम उठाना पड़ सकता है। फिलहाल ‘नाशा’ जैसे उपाय केवल अस्थायी राहत दे रहे हैं।