एल.सी. सिंह की ‘थिंग्स वी डोंट सी’ ने छुआ जीवन का अनदेखा सच

Sat 28-Mar-2026,10:57 AM IST +05:30

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एल.सी. सिंह की ‘थिंग्स वी डोंट सी’ ने छुआ जीवन का अनदेखा सच lc-singh-things-we-dont-see-book-launch-mumbai
  • यह संस्मरण पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है और बताता है कि वास्तविक सफलता बाहरी उपलब्धियों के साथ आंतरिक संतुलन में छिपी होती है।

  • मुंबई में आयोजित भव्य लॉन्च इवेंट में साहित्य, भावनाएं और व्यक्तिगत अनुभवों का संगम देखने को मिला, जहां कई प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल हुईं।

Maharashtra / Mumbai :

मुंबई/ मुंबई की एक सजी हुई, भावनाओं से भरी शाम में जब शब्दों ने अनुभवों का रूप लिया, तब बिजनेस लीडर और लेखक एल.सी. सिंह की संस्मरण पुस्तक ‘थिंग्स वी डोंट सी’ का लॉन्च सिर्फ एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन के उन अनकहे पहलुओं का उत्सव बन गया, जिन्हें हम अक्सर सफलता की चमक में नजरअंदाज कर देते हैं। यह किताब उपलब्धियों की कहानी कम और आत्मा की यात्रा ज्यादा है। एक ऐसी यात्रा, जो पाठकों को भीतर झांकने के लिए मजबूर करती है।
मुंबई में आयोजित इस खास अवसर पर जब एल.सी. सिंह ने अपनी पुस्तक ‘थिंग्स वी डोंट सी’ का अनावरण किया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति ने सिर्फ एक लेखक नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान को महसूस किया जिसने जीवन को गहराई से जिया, समझा और फिर शब्दों में ढाला। किताब में बचपन की जिज्ञासा, संघर्षों की कसक, असफलताओं की सीख और वैश्विक स्तर पर निर्णय लेने वाले बोर्डरूम तक का सफर बेहद संवेदनशील और ईमानदार अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। 

इस अवसर की भावनात्मक गहराई तब और बढ़ गई, जब एफ.सी. कोहली की स्मृतियों का प्रतिनिधित्व करतीं श्रीमती स्वर्ण कोहली, श्री सिंह के भाई उदयचंद्र सिंह और उनकी पुत्री स्वाति ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यह केवल एक लॉन्च नहीं था, बल्कि रिश्तों, यादों और कृतज्ञता का एक जीवंत संगम था, जिसने हर उपस्थित व्यक्ति को भीतर तक छू लिया।

‘थिंग्स वी डोंट सी’ पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या सफलता सिर्फ वही है जो दिखाई देती है, या फिर उसके पीछे भी कोई गहरी, अनकही सच्चाई छिपी होती है।
अपने अनुभवों और आत्मनिरीक्षण के जरिए एल.सी. सिंह ने एक ऐसा दर्पण पेश किया है, जिसमें हर पाठक खुद को देख सकता है। यह संस्मरण सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने और समझने के लिए है। एक ऐसी यात्रा, जो बाहर से ज्यादा भीतर की ओर ले जाती है।

(अनिल बेदाग)