बिजली उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का अधिकार, विद्युत अधिनियम की धारा 47 का भी मिला संरक्षण
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Smart Meter India
उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने की स्वतंत्रता.
बिना सहमति प्रीपेड मीटर लागू करना अवैध घोषित.
धारा 47 के तहत उपभोक्ता अधिकारों को मिला संरक्षण.
Lucknow / राज्य के बिजली उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण खबर है। नियामक आयोग द्वारा जारी नई कास्ट डेटा बुक और दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि उपभोक्ताओं को अपनी सुविधा के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड स्मार्ट मीटर चुनने का अधिकार होगा। बिजली कंपनियां किसी भी उपभोक्ता पर जबरन किसी एक प्रकार का मीटर थोप नहीं सकतीं। यह अधिकार विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के अंतर्गत दिया गया है, जिसमें उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा को प्राथमिकता दी गई है। नियमों के अनुसार उपभोक्ता की सहमति के बिना प्रीपेड मोड में कनेक्शन देना कानून के विरुद्ध माना जाएगा। नियामक व्यवस्था के इस स्पष्ट निर्देश के बाद अब राज्य में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया के दौरान उपभोक्ताओं की पसंद को महत्व देना अनिवार्य होगा।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के पदाधिकारियों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि लंबे समय से यह मांग उठाई जा रही थी कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया में उपभोक्ताओं की सहमति को अनिवार्य बनाया जाए। उन्होंने बताया कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47 उपभोक्ताओं के अधिकारों और बिजली कंपनियों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करती है। इस धारा के अंतर्गत बिजली वितरण कंपनियों को कनेक्शन देने के लिए सुरक्षा राशि या अन्य शर्तें तय करने का अधिकार जरूर है, लेकिन इसके साथ ही उपभोक्ता के हितों की रक्षा भी जरूरी है। परिषद का कहना है कि धारा 47(5) और उससे जुड़े प्रावधान यह सुनिश्चित करते हैं कि उपभोक्ताओं पर कोई भी व्यवस्था उनकी सहमति के बिना थोपना उचित नहीं है। इसी आधार पर यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्मार्ट मीटर लगाए जा सकते हैं, लेकिन उनका मोड यानी प्रीपेड या पोस्टपेड उपभोक्ता की इच्छा पर निर्भर करेगा।
नई कास्ट डेटा बुक में यह भी कहा गया है कि पोस्टपेड कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को सुरक्षा राशि जमा करानी पड़ सकती है, जिसके बाद उनका कनेक्शन पोस्टपेड मोड में जारी रहेगा। वहीं जो उपभोक्ता प्रीपेड मीटर चुनते हैं, वे पहले से रिचार्ज कर बिजली का उपयोग कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को अपनी आर्थिक स्थिति और सुविधा के अनुसार विकल्प चुनने का अवसर देती है। इसके साथ ही बिजली बिल को लेकर होने वाले विवाद भी कम हो सकते हैं, क्योंकि प्रीपेड व्यवस्था में जितना रिचार्ज होगा उतनी ही बिजली उपयोग की जा सकेगी, जबकि पोस्टपेड व्यवस्था में उपभोक्ता बाद में बिल का भुगतान करते हैं।
बिजली उपभोक्ता परिषद का कहना है कि पहले कई जगहों पर बिना स्पष्ट जानकारी दिए स्मार्ट मीटर को सीधे प्रीपेड मोड में बदलने की शिकायतें सामने आई थीं। अब नए निर्देशों के बाद ऐसी स्थितियों पर रोक लगेगी। परिषद के प्रतिनिधियों ने ऊर्जा मंत्री एके शर्मा तथा नियामक आयोग के अध्यक्ष और अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए आभार भी व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह फैसला लाखों उपभोक्ताओं के हित में है और इससे बिजली व्यवस्था में विश्वास और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगे।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली भविष्य की जरूरत है, लेकिन इसके साथ उपभोक्ता अधिकारों का संतुलन भी उतना ही जरूरी है। विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47 सहित अन्य प्रावधान इसी उद्देश्य से बनाए गए हैं ताकि बिजली वितरण कंपनियों और उपभोक्ताओं के बीच संतुलित और पारदर्शी व्यवस्था कायम रह सके। नए निर्देशों के बाद उम्मीद की जा रही है कि राज्य में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया तेज होगी, लेकिन साथ ही उपभोक्ताओं की पसंद और सहमति को भी पूरी तरह सम्मान मिलेगा।