ओरल सेक्स और HPV संक्रमण को लेकर बढ़ी चिंता, क्या गले के कैंसर का खतरा बढ़ रहा है?
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Oral Health Risk Factors
HPV संक्रमण से गले के कैंसर का खतरा बढ़ने की आशंका.
बिना तंबाकू सेवन वाले मरीजों में भी बढ़ रहे केस.
समय पर जांच और वैक्सीनेशन से बचाव संभव.
Delhi / भारत सहित दुनिया के कई देशों में सिर और गले के कैंसर के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है। लंबे समय तक इन बीमारियों की सबसे बड़ी वजह तंबाकू, गुटखा और धूम्रपान को माना जाता रहा है, लेकिन अब डॉक्टरों का कहना है कि कुछ मामलों में ह्यूमन पैपिलोमावायरस यानी Human Papillomavirus संक्रमण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह वायरस एक सामान्य संक्रमण है, जो त्वचा से त्वचा के संपर्क या अन्य शारीरिक संपर्क के माध्यम से फैल सकता है। हाल के वर्षों में चिकित्सा रिपोर्टों में ऐसे कई मरीज सामने आए हैं जिन्हें गले या मुंह का कैंसर हुआ, जबकि उन्होंने कभी तंबाकू या धूम्रपान का सेवन नहीं किया था। डॉक्टरों का मानना है कि ऐसे मामलों के पीछे HPV संक्रमण एक संभावित कारण हो सकता है। यही वजह है कि अब स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को इस संक्रमण और उससे जुड़े जोखिमों के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक HPV के कई प्रकार होते हैं, जिनमें से कुछ सामान्य होते हैं और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें समय के साथ खत्म भी कर देती है। हालांकि इसके कुछ हाई-रिस्क प्रकार, जैसे HPV-16 और HPV-18, लंबे समय तक शरीर में बने रहने पर कैंसर का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि यह प्रक्रिया बहुत धीरे-धीरे विकसित होती है और कई बार इसके प्रभाव सामने आने में 10 से 30 साल तक का समय लग सकता है। यही कारण है कि संक्रमण होने के लंबे समय बाद भी इसके परिणाम दिखाई दे सकते हैं। भारत में अभी भी सिर और गर्दन के कैंसर के अधिकांश मामलों के पीछे तंबाकू का सेवन ही प्रमुख कारण माना जाता है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि HPV से जुड़े मामलों की संख्या भी धीरे-धीरे बढ़ती दिखाई दे रही है। इसलिए किसी भी तरह के असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। गले में लगातार दर्द रहना, आवाज में बदलाव आना, निगलने में परेशानी होना, मुंह या गले में गांठ महसूस होना और बिना वजह वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत होती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और समय पर जांच इस बीमारी से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं। तंबाकू और धूम्रपान से दूरी बनाना, स्वस्थ जीवनशैली अपनाना और नियमित स्वास्थ्य जांच कराना जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है। इसके अलावा कई देशों में HPV संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीनेशन कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, जिन्हें भविष्य में कैंसर की रोकथाम का एक प्रभावी तरीका माना जा रहा है। डॉक्टरों का मानना है कि अगर शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान हो जाए तो इसका इलाज संभव है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। इसलिए लोगों को किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार सही जानकारी और सावधानी के जरिए इस तरह की गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।