पीयूष गोयल की निर्यात बैठक, 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य
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पीयूष गोयल की अध्यक्षता में भारत मंडपम में हुई बैठक में निर्यात बढ़ाने, बाजार विस्तार और एमएसएमई को वैश्विक व्यापार से जोड़ने पर जोर दिया गया।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का निर्यात 860.09 अरब डॉलर पहुंचा, सरकार ने 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य निर्धारित किया।
उद्योग संगठनों ने लागत और बाधाओं के मुद्दे उठाए, सरकार ने व्यापार सुगमता बढ़ाने और निर्यातकों को समर्थन देने का आश्वासन दिया।
Delhi/ केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी) और प्रमुख उद्योग संगठनों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का उद्देश्य बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य के बीच भारत के निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत बनाना था।
बैठक भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से जुड़े कार्यक्रम के दौरान आयोजित की गई, जिसमें करीब 30 निर्यात संवर्धन परिषदों, उद्योग मंडलों और वाणिज्य विभाग व विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
अपने संबोधन में मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल माल और सेवा निर्यात 860.09 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.22 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अभियांत्रिकी वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, रत्न एवं आभूषण और कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों ने निर्यात को मजबूती दी है।
श्री गोयल ने 2030 तक 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में इस उपलब्धि को महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने निर्यातकों से अपील की कि वे मुक्त व्यापार समझौतों का अधिकतम लाभ उठाकर नए बाजारों में प्रवेश करें और अपनी वैश्विक उपस्थिति को मजबूत बनाएं।
बैठक के दौरान डीजीएफटी ने निर्यात सुधारों, प्रदर्शन संकेतकों (केपीआई), ई-कॉमर्स निर्यात को बढ़ावा देने और जिलों को निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। साथ ही डिजिटल ट्रेड अकादमी की स्थापना, निर्यात संवर्धन मिशन की प्रगति और निर्यात दायित्व मुक्ति प्रमाणपत्र (ईओडीसी) जारी करने की प्रक्रिया को तेज करने पर भी चर्चा हुई।
उद्योग प्रतिनिधियों ने अनुपालन लागत, परीक्षण मानकों और एमएसएमई के सामने आने वाली चुनौतियों को उठाया। इस पर मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार व्यापार सुगमता बढ़ाने और बाधाओं को कम करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
बैठक में फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स, फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और एसोचैम सहित कई प्रमुख संस्थानों ने भाग लिया।
अंत में, मंत्री ने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई कि निरंतर सुधार, उद्योग सहयोग और लक्षित नीतियों के माध्यम से भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक आपूर्ति भागीदार के रूप में स्थापित किया जाएगा।