RRB परिषद 2026: ग्रामीण बैंकों के सुधार पर मंथन
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RRB Council 2026: Experts Discuss Next-Gen Reforms for Rural Banks
नई दिल्ली में आयोजित आरआरबी परिषद 2026 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के आधुनिकीकरण, डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय समावेशन को मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने आरआरबी की आईटी अवसंरचना को मजबूत करने, डिजिटल प्लेटफॉर्म बढ़ाने और क्षेत्रीय भाषाओं में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।
New Delhi/ नई दिल्ली में इंडियन बैंकर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित RRB Council 2026 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के भविष्य, डिजिटल बदलाव और वित्तीय समावेशन पर व्यापक चर्चा हुई। इस परिषद का आयोजन Indian Banks’ Association ने वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के मार्गदर्शन में किया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) के लिए अगली पीढ़ी के सुधारों की दिशा तय करना और उन्हें विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप मजबूत बनाना था।
नई दिल्ली में आयोजित RRB Council 2026 में देशभर के क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के अध्यक्षों, वित्त मंत्रालय के अधिकारियों और बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया। परिषद का उद्देश्य क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के सामने आने वाली चुनौतियों, अवसरों और भविष्य के सुधारों पर विस्तृत विचार-विमर्श करना था।
इस सम्मेलन का आयोजन Indian Banks’ Association द्वारा किया गया, जिसमें वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भागीदारी की। कार्यक्रम में संयुक्त सचिव Ashish Madhavrao More, आईबीए के मुख्य कार्यकारी Atul Kumar Goel और National Bank for Agriculture and Rural Development के उप प्रबंध निदेशक Govardhan S. Rawat समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
परिषद के दौरान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के आधुनिकीकरण और उनकी भूमिका को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में आरआरबी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए इन बैंकों को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना, उनकी सेवाओं को आधुनिक बनाना और डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देना समय की जरूरत है।
सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इनमें उभरते भारत के लिए बैंकिंग व्यवस्था, कृषि वित्तपोषण में नवाचार, डिजिटल और तकनीकी परिवर्तन, वित्तीय समावेशन, ग्राहक सुविधा और आरआरबी के मानव संसाधन विकास जैसे विषय प्रमुख रहे।
वित्तीय सेवा विभाग के संयुक्त सचिव Ashish Madhavrao More ने अपने संबोधन में कहा कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाना होगा। उन्होंने कहा कि आरआरबी की सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना को आधुनिक बनाना बेहद जरूरी है, ताकि बैंक ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर और तेज सेवाएं दे सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के लिए हमेशा उपलब्ध रहने वाला बैंक बनना होना चाहिए। इसके लिए उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल बैंकिंग और अन्य तकनीकी माध्यमों का अधिक उपयोग करना होगा।
सम्मेलन में यह भी सुझाव दिया गया कि ग्राहक जुड़ाव बढ़ाने के लिए बैंक क्षेत्रीय भाषाओं में डिजिटल सेवाओं और संचार माध्यमों को विकसित करें। इससे ग्रामीण ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं को समझने और उपयोग करने में आसानी होगी।
इसके अलावा बैंकिंग क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने और एक-दूसरे से सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि आरआरबी के बीच सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने से उनकी कार्यक्षमता और सेवा गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
परिषद में हुए विचार-विमर्श से उम्मीद जताई जा रही है कि इससे क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए स्पष्ट दिशा मिलेगी। साथ ही शासन व्यवस्था, तकनीकी क्षमता और मानव संसाधन विकास के क्षेत्रों में सुधार के नए अवसर भी सामने आएंगे।