छत्तीसगढ़ में विवेकानंद स्कूल योजना तेज, 150 ग्रामीण स्कूलों में अंग्रेजी शिक्षा

Wed 06-May-2026,04:07 PM IST +05:30

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छत्तीसगढ़ में विवेकानंद स्कूल योजना तेज, 150 ग्रामीण स्कूलों में अंग्रेजी शिक्षा Chhattisgarh-Vivekananda-School-Scheme
  • छत्तीसगढ़ सरकार 150 ग्रामीण स्कूलों में स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना लागू करेगी, जिसमें अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा देने पर विशेष जोर रहेगा।

  • आत्मानंद स्कूलों के विपरीत इस योजना में फीस लागू होगी, जिससे सरकारी वित्तीय दबाव कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

  • योजना 2026-27 सत्र से लागू होगी, प्रवेश प्रक्रिया जल्द शुरू होगी और चयनित स्कूलों में 12वीं तक पढ़ाई अनिवार्य होगी।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur/ सरकार द्वारा इस योजना के पहले चरण में राज्यभर से 150 शासकीय विद्यालयों का चयन किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक ब्लॉक से एक-एक स्कूल का प्रस्ताव मांगा गया है। खास बात यह है कि चयन केवल ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों से किया जा रहा है, ताकि वहां के छात्रों को प्राथमिकता मिल सके।

चयन के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि संबंधित स्कूल में 12वीं कक्षा तक पढ़ाई संचालित होनी चाहिए। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि छात्रों को एक ही परिसर में निरंतर शिक्षा मिल सके।

सरकार ने इस योजना को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू करने की तैयारी कर ली है। प्रवेश प्रक्रिया अगले महीने से शुरू होने की संभावना है। इन विद्यालयों में पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम में होगी और इसे स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना की तर्ज पर संचालित किया जाएगा। हालांकि, इनकी संबद्धता सीबीएसई के बजाय राज्य बोर्ड से ही बनी रहेगी।

इस योजना में एक बड़ा बदलाव फीस को लेकर किया गया है। जहां आत्मानंद स्कूलों में शिक्षा निशुल्क थी, वहीं अब विवेकानंद स्कूलों में छात्रों से फीस ली जाएगी। सरकार का कहना है कि स्कूलों की संख्या बढ़ने के कारण वित्तीय दबाव बढ़ा, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया है। फीस संरचना अन्य सरकारी स्कूलों के समान रखी जाएगी।

रायपुर जिले से चार स्कूलों का चयन किया गया है, जिनमें धरसींवा, आरंग, अभनपुर और तिल्दा ब्लॉक के विद्यालय शामिल हैं। जिला शिक्षा विभाग ने इन नामों को पहले ही भेज दिया है।

यह योजना ग्रामीण शिक्षा को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकती है। अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई से छात्रों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का समान अवसर मिलेगा।