रायपुर में कुपोषण की समस्या बरकरार, हजारों बच्चे अब भी प्रभावित

Tue 05-May-2026,06:14 PM IST +05:30

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रायपुर में कुपोषण की समस्या बरकरार, हजारों बच्चे अब भी प्रभावित Raipur-Malnutrition-Children-Survey-2025
  • रायपुर जिले में 2025 सर्वे के अनुसार करीब 2 हजार बच्चे गंभीर और 15-17 हजार मध्यम कुपोषण से प्रभावित पाए गए, जिससे चिंता बढ़ी।

  • तिल्दा और अभनपुर क्षेत्र में कुपोषण के सबसे ज्यादा मामले, शहरी बस्तियों और बीएसयूपी कॉलोनियों में स्थिति ज्यादा गंभीर बनी हुई है।

  • आंगनबाड़ी योजनाओं के बावजूद जमीनी स्तर पर असर सीमित, विशेषज्ञों ने तेज और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता बताई।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur/ छत्तीसगढ़ के Raipur जिले में बच्चों में कुपोषण की समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। हाल ही में किए गए सर्वे में यह स्थिति एक बार फिर उजागर हुई है।

वर्ष 2025 में आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों के वजन और पोषण स्तर की जांच की गई। विभागीय आंकड़ों के अनुसार लगभग 2 हजार बच्चे गंभीर कुपोषण की श्रेणी में पाए गए, जबकि 15 से 17 हजार बच्चे मध्यम कुपोषण से प्रभावित हैं। अधिकारियों का कहना है कि गंभीर कुपोषित बच्चों में अधिकांश नवजात से लेकर 6 महीने तक की आयु के हैं, जिनके लिए विशेष देखभाल और पोषण की आवश्यकता है।

वजन त्योहार के दौरान जिले में एक लाख से अधिक बच्चों का वजन मापा गया। इस दौरान कई बच्चों का वजन सामान्य से काफी कम पाया गया, जिसके चलते उन्हें कुपोषित श्रेणी में शामिल किया गया। ऐसे बच्चों को विशेष पोषण आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुपोषित बच्चों की संख्या में धीरे-धीरे कमी आई है। वर्ष 2023 में 20,600 मध्यम और 3,662 गंभीर कुपोषित बच्चे थे, जो 2024 में घटकर 20,185 मध्यम और 3,081 गंभीर रह गए। वर्ष 2025 में यह संख्या 17,613 मध्यम और 2,651 गंभीर तक पहुंच गई। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह कमी अपेक्षा के अनुसार तेज नहीं है।

कुपोषण को रोकने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार, बच्चों का टीकाकरण, विटामिन सप्लीमेंट और जागरूकता अभियान शामिल हैं। इसके बावजूद इन योजनाओं का पूरा प्रभाव जमीनी स्तर पर नहीं दिख रहा है।

जिले के Tilda और Abhanpur क्षेत्रों में कुपोषण के मामले सबसे ज्यादा सामने आए हैं। इसके अलावा Arang, Dharseeva और शहरी बस्तियों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

विशेष रूप से बीएसयूपी कॉलोनियों और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले बच्चों में कुपोषण की समस्या ज्यादा गंभीर है। Bhatagaon जैसे इलाकों में कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर बड़ी संख्या में गंभीर कुपोषित बच्चे दर्ज किए गए हैं।

यह स्थिति बताती है कि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और जागरूकता बढ़ाने की दिशा में अभी और ठोस प्रयासों की आवश्यकता है, ताकि बच्चों को स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य मिल सके।