स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि नाव में सवार दस लोगों में से चार को बचा लिया गया है। बाकी पीड़ितों को बचाने के लिए एसडीआरएफ की टीम तत्काल रवाना हो गई। सूरवाल बांध सवाई माधोपुर का सबसे बड़ा बांध है, जो पास के नालों और नदियों से पानी प्राप्त करता है और बनास नदी से जुड़ा हुआ है। रात भर हुई बारिश के कारण बांध में अचानक जल स्तर बढ़ गया, जिससे यह हादसा हुआ।
मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के दक्षिणी हिस्सों में कोटा और बूंदी से होकर गुजर रही मानसून ट्रफ लाइन के चलते कोटा, बूंदी, बारां, सवाई माधोपुर, टोंक, चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा जिलों में भारी बारिश की संभावना है। सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन पर भी दो से डेढ़ फीट पानी भर गया है, जिससे जयपुर को जोड़ने वाली रेलवे लाइन पर देरी हुई।
भारी बारिश के कारण कोटा और बूंदी में रविवार तक स्कूलों की छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं। कई गांवों का संपर्क टूट गया है, जबकि कोटा शहर के सुल्तानपुर इलाके में पानी घरों में घुसने से लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। भीलवाड़ा के बिजोलिया क्षेत्र में 166 मिमी बारिश दर्ज की गई है और नदियां उफान पर हैं। खेतों और गांवों में जलभराव की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन और राहत कार्यों को सतर्क रहना पड़ रहा है।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से नदी और नाले के किनारे जाने से बचने की चेतावनी दी है। भारी बारिश और नदियों के उफान के कारण आने वाले समय में और सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन बचाव और राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। सवाई माधोपुर की यह घटना मानसून के दौरान बढ़ते खतरे और नदियों में पानी के उफान का स्पष्ट उदाहरण है। स्थानीय लोगों और प्रशासन की तत्परता ही ऐसे हादसों में जीवन बचाने में मदद कर सकती है।
इस तरह, सवाई माधोपुर की नदी में नाव पलटना और भारी बारिश के कारण उत्पन्न हालात ने एक बार फिर मानसून में सतर्क रहने की आवश्यकता को उजागर किया है।