संसद का मानसून सत्र 2025 : हंगामे और विधेयकों के बीच समापन
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मानसून सत्र 2025 में विपक्ष और सरकार के बीच टकराव.
लोकसभा और राज्यसभा में कुल 26 विधेयक पारित.
ऑनलाइन गेमिंग बैन और असम IIM बिल प्रमुख चर्चा में.
Delhi / आज, 21 अगस्त को संसद का मानसून सत्र 2025 अपने अंतिम दिन समाप्त हो गया। यह सत्र 21 जुलाई से शुरू हुआ था और लगभग एक महीने तक चला। पूरे सत्र में कामकाज की तुलना में व्यवधान, स्थगन और विपक्ष के बायकॉट ने ज्यादा सुर्खियां बटोरीं। हालांकि लोकसभा और राज्यसभा में कुल मिलाकर कई अहम विधेयक पारित हुए, लेकिन संसद की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि इस सत्र में 120 घंटे चर्चा का समय निर्धारित था, मगर महज़ 37 घंटे ही चर्चा हो पाई। बार-बार हंगामे और विपक्ष के विरोध के कारण बहस अधूरी रह गई। इसी वजह से दो बार स्थगन के बाद अंततः लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
लोकसभा ने इस सत्र में 12 विधेयक पारित किए। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण ऑनलाइन गेमिंग प्रमोशन और रेगुलेशन बिल, 2025 रहा, जिसके तहत ऑनलाइन मनी गेम्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा गृह मंत्री अमित शाह ने तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए। इनमें प्रावधान है कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री अगर गिरफ्तार होते हैं या 30 दिन से अधिक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें पद छोड़ना होगा—शर्त यह है कि जिस अपराध के लिए गिरफ्तारी हुई हो, उसमें 5 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान होना चाहिए। इस प्रस्ताव ने सदन में गर्माहट बढ़ा दी। विपक्ष ने इन बिलों का विरोध करते हुए हंगामा किया और उनकी प्रतियां फाड़कर गृह मंत्री की ओर उछाल दीं।
राज्यसभा ने इस सत्र में 14 विधेयक पारित किए। पहले ही दिन बिना किसी व्यवधान के बिल ऑफ लैडिंग बिल, 2025 पारित कर दिया गया। इसके बाद अधिकांश विधेयक विपक्षी हंगामे या बायकॉट के बीच पारित हुए। सबसे अहम भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2025 रहा, जिसके जरिए असम की राजधानी गुवाहाटी में देश का 22वां IIM स्थापित किया जाएगा। चूंकि असम में अगले साल चुनाव प्रस्तावित हैं, इसलिए इसे राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विपक्ष ने इस सत्र में लगातार बिहार SIR पर चर्चा की मांग उठाई। विपक्षी सांसदों का कहना था कि सरकार इस विषय से बच रही है, इसलिए उन्होंने सदन की कार्यवाही बाधित की। नतीजा यह हुआ कि कई अहम मुद्दों पर व्यापक बहस नहीं हो सकी।
पूरे सत्र में लोकसभा में कुल 419 प्रश्न पूछे गए, जिनमें से केवल 55 के ही उत्तर दिए जा सके। यह आंकड़ा बताता है कि संसदीय कार्य की गुणवत्ता पर हंगामे का कितना असर पड़ा।
सत्र के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में पहुंचे। विपक्ष ने फिर से SIR पर चर्चा की मांग करते हुए हंगामा किया। इस दौरान राष्ट्रगीत बजाया गया और उसके बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
कुल मिलाकर मानसून सत्र 2025 विधायी कार्य और राजनीतिक टकराव, दोनों ही दृष्टि से उल्लेखनीय रहा। जहां एक ओर ऑनलाइन गेमिंग बैन और गुवाहाटी में IIM जैसे विधेयक पारित हुए, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और सरकार के बीच टकराव ने लोकतांत्रिक बहस की गंभीरता को कमजोर किया। संसद का यह सत्र यह संदेश देकर समाप्त हुआ कि राजनीति में सहमति और संवाद के बिना जनहित के मुद्दे अधर में अटक जाते हैं।