लोकसभा में हंगामा: केंद्र सरकार ने पेश किए तीन विवादित बिल, विपक्ष का कड़ा विरोध
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लोकसभा में अमित शाह ने 3 विवादित बिल पेश किए।
विपक्ष ने सदन में हंगामा कर किया जोरदार विरोध।
राजनीतिक हलचल और जनता के बीच बढ़ी चर्चाएं।
Delhi / केंद्र सरकार ने बुधवार को लोकसभा में तीन अहम और विवादास्पद विधेयक पेश किए, जिनके तहत गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री या राज्य मंत्री को 30 दिनों की लगातार हिरासत के बाद उनके पद से हटाने का प्रावधान किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ये तीनों बिल संसद में पेश किए, लेकिन इनके सामने आते ही लोकसभा में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और AIMIM समेत कई विपक्षी दलों ने इन बिलों का विरोध किया और इन्हें “संविधान विरोधी” तथा “न्याय विरोधी” करार दिया।
केंद्र सरकार का कहना है कि मौजूदा कानूनों और संविधान में इस तरह के मामलों पर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। अभी तक केवल दोषी ठहराए गए जनप्रतिनिधियों को ही पद से हटाया जा सकता था। लेकिन कई मामलों में देखा गया है कि गंभीर आपराधिक आरोपों और लंबी हिरासत के बावजूद मुख्यमंत्री या मंत्री पद पर बने रहते हैं। इसका उदाहरण दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और तमिलनाडु के मंत्री वी सेंथिल बालाजी के मामले में देखने को मिला। केजरीवाल शराब नीति मामले में गिरफ्तारी के बावजूद छह महीने तक पद पर बने रहे थे, जबकि सेंथिल बालाजी 241 दिन जेल में रहते हुए भी मंत्री बने रहे।
सरकार का तर्क है कि इस तरह की स्थिति लोकतंत्र और सुशासन की साख को नुकसान पहुंचाती है। इसलिए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को हटाने के लिए संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव किया जाना जरूरी है। इसके लिए सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। साथ ही गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज एक्ट, 1963 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धाराओं में भी संशोधन करने की बात कही गई है, ताकि केंद्र शासित प्रदेशों और जम्मू-कश्मीर में भी ऐसे प्रावधान लागू किए जा सकें।
तीन बिलों में कहा गया है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को पांच साल या उससे अधिक सजा वाले अपराध के आरोप में गिरफ्तार कर लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है, तो 31वें दिन उसे पद से हटा दिया जाएगा। यह फैसला राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर लेंगे।
हालांकि, विपक्ष ने इन बिलों पर तीखी आपत्ति जताई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इन प्रावधानों का इस्तेमाल गैर-भाजपा शासित राज्यों की सरकारों को अस्थिर करने और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए करेगी। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे “लोकतंत्र पर हमला” बताया, जबकि कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह प्रस्ताव विपक्षी नेताओं की मनमानी गिरफ्तारी का रास्ता साफ करेगा। समाजवादी पार्टी ने भी इसे संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ करार दिया।
तीनों विवादित विधेयकों के साथ ही केंद्र सरकार ने बुधवार को ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध लगाने से जुड़ा बिल भी पेश किया। इसमें ऑनलाइन मनी गेमिंग, अवैध विज्ञापन और खेलों के लिए उकसाने वालों को तीन साल तक की जेल, एक करोड़ रुपए तक का जुर्माना या दोनों सजा का प्रावधान है।
अमित शाह ने इन सभी विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने का प्रस्ताव भी रखा। अब यह देखना होगा कि संसद में इन पर क्या रुख अपनाया जाता है। लेकिन फिलहाल, इन विधेयकों ने सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव को और तेज कर दिया है।