नवजात शिशु मौत पर NHRC जांच

Fri 13-Mar-2026,04:56 PM IST +05:30

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  • झारखंड के चक्रधरपुर उपमंडल अस्पताल में नवजात शिशु की मौत और परिवार को एम्बुलेंस सुविधा न मिलने की घटना पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया।

  • मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मृत नवजात के पिता को अस्पताल से कोई मदद नहीं मिली, जिसके बाद उन्हें बच्चे का शव गत्ते के बक्से में घर ले जाना पड़ा।

Jharkhand / Ranchi :

झारखंड/ झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर उपमंडल अस्पताल से जुड़ी एक दर्दनाक घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक नवजात शिशु की मौत के बाद परिवार को अस्पताल से किसी प्रकार की सहायता नहीं मिलने और एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध न कराए जाने की खबर सामने आने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मामले को मानवाधिकारों के संभावित उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए राज्य प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह घटना 7 मार्च 2026 की है। बताया गया है कि प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर उचित चिकित्सा देखभाल नहीं मिलने के कारण नवजात शिशु की मृत्यु हो गई। इसके बाद जब परिवार ने शव को घर ले जाने के लिए अस्पताल प्रशासन से सहायता मांगी तो उन्हें एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि मृत शिशु के पिता को मजबूर होकर बच्चे के शव को एक गत्ते के बक्से में रखकर अपने गांव बंगरासाई ले जाना पड़ा। यह घटना सामने आने के बाद लोगों में गहरा आक्रोश देखा गया और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल उठने लगे।

इस मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए झारखंड के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव और पश्चिम सिंहभूम के उपायुक्त को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दोनों अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

आयोग ने कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्टों में दी गई जानकारी सही पाई जाती है तो यह पीड़ित परिवार के मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला माना जाएगा। आयोग ने प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि अस्पताल में ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हुई और पीड़ित परिवार को आवश्यक सहायता क्यों नहीं दी गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल उठाती है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच रिपोर्ट में क्या सामने आता है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।