शिवराज सिंह चौहान बोले- MSP, फसल बीमा सुधार और वैकल्पिक खेती से किसानों को बड़ा लाभ
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मोदी सरकार ने तंबाकू जैसी हानिकारक फसलों के विकल्प के रूप में लाभकारी फसलें बढ़ावा देकर किसानों की आय और पर्यावरण संरक्षण दोनों को मजबूत किया है।
फसल बीमा योजना में सुधार, 21 दिन में भुगतान और देरी पर ब्याज प्रावधान से किसानों को समयबद्ध मुआवजा और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
Delhi/ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में किसानों से जुड़े मुद्दों पर जवाब देते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार करते हुए किसानों की आय बढ़ाने और जोखिम कम करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने तंबाकू जैसी हानिकारक फसलों के स्थान पर लाभकारी विकल्प, एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद और फसल बीमा योजना में सुधार को सरकार की बड़ी उपलब्धियां बताया।
अपने वक्तव्य में श्री चौहान ने कहा कि सरकार ने केवल तंबाकू उत्पादन कम करने की अपील नहीं की, बल्कि किसानों को व्यवहारिक विकल्प भी दिए हैं। जिन क्षेत्रों में तंबाकू की खेती होती है, वहां हाइब्रिड मक्का, मिर्च, शकरकंद, कपास, आलू, चिया, सोयाबीन, मूंगफली और रागी जैसी फसलों को लाभकारी विकल्प के रूप में चिन्हित किया गया है। इससे किसानों की आय सुरक्षित रखने के साथ-साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश किसान छोटे और सीमांत वर्ग के हैं, जिनके लिए केवल एक फसल पर निर्भर रहना जोखिमपूर्ण होता है। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने एकीकृत खेती (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) को बढ़ावा दिया है। इसके तहत किसान फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन और बागवानी जैसी गतिविधियां अपनाकर सालभर स्थिर आय अर्जित कर सकते हैं।
एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) के मुद्दे पर मंत्री ने बताया कि गेहूं, धान, दलहन और तिलहन सहित प्रमुख फसलों के समर्थन मूल्य में वृद्धि की गई है और वर्तमान सीजन में रिकॉर्ड स्तर पर खरीद हो रही है। उन्होंने विशेष रूप से तुअर, मसूर और उड़द जैसी दालों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजीकृत किसानों की पूरी उपज खरीदने की व्यवस्था की गई है।
फसल बीमा योजना में सुधारों का जिक्र करते हुए श्री चौहान ने कहा कि पहले किसानों को मुआवजा मिलने में लंबा समय लगता था, लेकिन अब नियमों में बदलाव कर प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया गया है। यदि किसी एक किसान की फसल भी खराब होती है, तो उसे मुआवजा मिलेगा। साथ ही, 21 दिनों के भीतर भुगतान न होने पर बीमा कंपनियों और राज्यों को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ राशि देनी होगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी कर रही है। डिजिटल पोर्टल्स के माध्यम से शिकायतों की जांच की जा रही है और गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। डीबीटी के जरिए किसानों के खातों में सीधे भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो रही है।