श्रीलंका में 4 दिन का वर्किंग वीक लागू: ईंधन संकट से निपटने के लिए बड़ा कदम

Tue 17-Mar-2026,01:58 PM IST +05:30

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Sri Lanka Fuel Crisis
  • श्रीलंका में 4 दिन का कार्य सप्ताह लागू.

  • ईंधन बचाने के लिए क्यूआर कोड राशनिंग सिस्टम. 

  • निजी क्षेत्र से भी सहयोग की अपील.

Central Province / Talawakele :

Sri Lanka / श्रीलंका सरकार ने 16 मार्च को देश में चार दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने का बड़ा फैसला लिया है। बढ़ते ऊर्जा संकट और ईंधन की भारी कमी को देखते हुए अब हर बुधवार सरकारी दफ्तरों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों में छुट्टी रहेगी। सरकार का मानना है कि इससे परिवहन में होने वाली ईंधन खपत में कमी आएगी और सीमित संसाधनों को लंबे समय तक बचाया जा सकेगा।

ईंधन बचाने के लिए सख्त कदम
कोलंबो में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों ने साफ कहा कि यह फैसला मजबूरी में लिया गया है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण ईंधन की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे देश में संकट और गहरा गया है। ऐसे में सप्ताह में एक दिन छुट्टी देकर ईंधन की खपत कम करना सरकार की प्राथमिकता बन गई है।

हालांकि, स्वास्थ्य, जल आपूर्ति, बंदरगाह और सीमा शुल्क जैसे जरूरी विभागों में काम पहले की तरह जारी रहेगा, ताकि आम जनता को जरूरी सेवाओं में कोई दिक्कत न हो।

QR कोड सिस्टम से ईंधन वितरण
सरकार ने ईंधन की कालाबाजारी रोकने और समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए क्यूआर कोड आधारित डिजिटल राशनिंग प्रणाली भी लागू की है। अब हर वाहन के अनुसार साप्ताहिक ईंधन कोटा तय किया जाएगा और उसे डिजिटल रूप से ट्रैक किया जाएगा। इस नई व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर नागरिक को जरूरत के अनुसार ईंधन मिले और कोई भी इसका गलत इस्तेमाल न कर सके।

निजी क्षेत्र से भी सहयोग की अपील
सरकार ने निजी कंपनियों और संस्थानों से भी इस पहल में शामिल होने की अपील की है। अधिकारियों का मानना है कि अगर प्राइवेट सेक्टर भी वर्किंग डेज कम करता है, तो ऊर्जा संकट के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह कदम केवल सरकारी स्तर पर नहीं, बल्कि पूरे देश की भागीदारी से ही सफल हो सकता है।

संकट से समाधान की ओर
श्रीलंका इस समय गंभीर आर्थिक और ऊर्जा संकट से गुजर रहा है। ऐसे में यह फैसला एक अस्थायी लेकिन जरूरी उपाय के रूप में देखा जा रहा है।

सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से ईंधन की बचत होगी, आपूर्ति बेहतर होगी और देश धीरे-धीरे इस संकट से उबर पाएगा। यह पहल दिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी सही रणनीति और सामूहिक प्रयास से समाधान निकाला जा सकता है।