अमेरिका-ईरान तनाव: रक्षा मंत्री का बड़ा बयान, नाकेबंदी जारी
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अमेरिकी रक्षा मंत्री ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को “दुनिया के लिए तोहफा” बताया और जहाजों की नाकेबंदी जारी रखने का संकेत दिया।
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को निर्णायक बताते हुए दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हुई और परमाणु हथियार विकास पर रोक लगी।
हेगसेथ ने कहा कि ईरान के पास समझौते का मौका है, लेकिन सीजफायर को लेकर उनके बयान ने अंतरराष्ट्रीय विवाद बढ़ा दिया।
US Iran/ अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पीट हेगसेथ ने एक बड़ा और विवादित बयान दिया है। अमेरिका के रक्षा मंत्री ने हालिया सैन्य कार्रवाई को “दुनिया के लिए तोहफा” बताते हुए कहा कि यह कदम वैश्विक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। पेंटागन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ सख्त रुख जारी रहेगा।
हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी जहाजों की नाकेबंदी तब तक जारी रखी जाएगी, जब तक सुरक्षा कारणों से इसकी आवश्यकता बनी रहेगी। उनका दावा है कि यह रणनीति ईरान के संभावित खतरे को सीमित करने और अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने के लिए जरूरी है।
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस सैन्य अभियान ने कुछ ही हफ्तों में निर्णायक परिणाम दिए हैं। उनके अनुसार, इस ऑपरेशन के चलते ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है और अब उसके लिए परमाणु हथियार विकसित करना संभव नहीं होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका की नाकेबंदी और अधिक मजबूत होती जा रही है और किसी भी संदिग्ध जहाज को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही।
ईरान को संदेश देते हुए हेगसेथ ने कहा कि उसके पास अब भी कूटनीतिक समाधान का अवसर है। अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पारदर्शी और सत्यापित तरीके से समाप्त करता है, तो बातचीत का रास्ता खुला है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इस मामले में यूरोप पर निर्भर नहीं है, जबकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लिए यूरोपीय देशों की निर्भरता अधिक है।
हेगसेथ के बयान का सबसे विवादास्पद हिस्सा वह था, जिसमें उन्होंने दावा किया कि ईरान ने सीजफायर के लिए “भीख मांगी” थी। उनके अनुसार, अमेरिकी कार्रवाई ने ईरानी सेना को इतना कमजोर कर दिया है कि वह आने वाले कई वर्षों तक किसी बड़े सैन्य संघर्ष में शामिल होने की स्थिति में नहीं है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान वैश्विक राजनीति में तनाव को और बढ़ा सकते हैं। कई विश्लेषकों ने इस तरह के दावों को अतिशयोक्तिपूर्ण बताते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी है।
फिलहाल, अमेरिका और ईरान के बीच संबंध बेहद संवेदनशील दौर में हैं और आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों देश कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ते हैं या तनाव और गहराता है।