धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सफाई: ‘चार बच्चे हों तो एक राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित करें’

Sun 26-Apr-2026,11:56 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सफाई: ‘चार बच्चे हों तो एक राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित करें’ Dhirendra Krishna Shastri
  •  धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने RSS वाले बयान पर अपनी सफाई दी।

  • उन्होंने कहा कि उद्देश्य राष्ट्रवादी सोच और हिंदुत्व को मजबूत करना है।

  • बच्चे को राष्ट्र सेवा और सनातन मूल्यों से जोड़ने की बात कही।

Maharashtra / Nagpur :

Nagpur / महाराष्ट्र में एक कार्यक्रम के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर Dhirendra Krishna Shastri के बयान ने एक बार फिर चर्चा का माहौल बना दिया है। ‘चार बच्चे पैदा करो और एक RSS को समर्पित करो’ वाले उनके पुराने बयान पर सवाल उठने के बाद उन्होंने अब इस पर अपनी सफाई दी है।

शास्त्री ने कहा कि लोग उनसे यह सवाल करते हैं कि उनके खुद के बच्चे नहीं हैं, तो वे ऐसी बात कैसे कर सकते हैं। इस पर उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि भविष्य में वे भी गृहस्थ जीवन अपनाएंगे और भगवान की इच्छा के अनुसार हिंदू समाज की जनसंख्या बढ़ाने में योगदान देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान का मकसद किसी पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि समाज में राष्ट्रवादी सोच को मजबूत करना है।

उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी के चार बच्चे हैं, तो उनमें से एक को ऐसे मार्ग पर आगे बढ़ाया जाए, जहां वह राष्ट्र और समाज के लिए काम कर सके। उनका कहना था कि इसका मतलब केवल RSS से जोड़ना नहीं है, बल्कि बच्चे को सेना, प्रशासन, शिक्षा या किसी भी ऐसे क्षेत्र में भेजा जा सकता है, जहां वह देशहित में योगदान दे सके। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि उस बच्चे की विचारधारा राष्ट्रवादी और हिंदुत्व के मूल्यों से जुड़ी होनी चाहिए।

शास्त्री के इस बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने वाला विचार मान रहे हैं, तो कुछ इसे एक खास विचारधारा से जोड़कर देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

कुल मिलाकर, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने बयान को स्पष्ट करते हुए यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनका उद्देश्य समाज में देशभक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करना है, न कि किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना।