रायपुर में सरेंडर नक्सलियों का विधानसभा भ्रमण
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Surrendered-Naxals-Visit-Chhattisgarh-Assembly-Raipur
सैकड़ों आत्मसमर्पित नक्सलियों ने रायपुर में विधानसभा भ्रमण कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को करीब से समझा और पुनर्वास नीति की जानकारी ली।
सरकार की पहल का उद्देश्य हिंसा छोड़ चुके युवाओं को मुख्यधारा से जोड़कर आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की ओर प्रेरित करना है।
Raipur/ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज रहीं। विधानसभा बजट सत्र के पांचवें दिन एक अनूठी पहल के तहत सैकड़ों आत्मसमर्पित नक्सली विधानसभा का भ्रमण करने पहुंचे। यह कार्यक्रम राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और मुख्यधारा से जुड़ने की प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस पहल का नेतृत्व उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा कर रहे हैं, जिन्होंने स्वयं इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की।
सुबह करीब 10:30 बजे सभी आत्मसमर्पित नक्सली छत्तीसगढ़ विधानसभा पहुंचे, जहां उन्हें सदन की कार्यप्रणाली, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और विधायी कार्यों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि किस प्रकार विधानसभा में प्रश्नकाल, चर्चा और विधेयकों पर निर्णय होते हैं। इस पहल का उद्देश्य पूर्व नक्सलियों को लोकतंत्र की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सकारात्मक दिशा देना है।
इस कार्यक्रम का नेतृत्व उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया। जानकारी के अनुसार, बीती रात उन्होंने सभी आत्मसमर्पित युवाओं के साथ रात्रिभोज भी किया। इस दौरान राज्य सरकार की नई पुनर्वास नीति, स्वरोजगार योजनाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों और शिक्षा संबंधी सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार का संदेश स्पष्ट था कि जो युवा हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे हैं, उन्हें सम्मान और अवसर दोनों मिलेंगे।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार इन युवाओं को रोजगार, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। पुनर्वास नीति के तहत आवास, शिक्षा और लोन सुविधा जैसी योजनाओं को भी जोड़ा गया है, ताकि वे समाज में आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक संदेश देगी। इससे अन्य भटके हुए युवाओं को भी आत्मसमर्पण के लिए प्रेरणा मिल सकती है। विधानसभा भ्रमण के माध्यम से सरकार ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि लोकतंत्र में संवाद और विकास ही स्थायी समाधान है। कुल मिलाकर, रायपुर में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्संयोजन और विश्वास निर्माण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।