छत्तीसगढ़ में गाइडलाइन दर बढ़ी, रजिस्ट्री और राजस्व में गिरावट
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गाइडलाइन दरों में वृद्धि के बाद छत्तीसगढ़ में संपत्ति रजिस्ट्री की रफ्तार धीमी, पहले नौ महीनों में राजस्व में गिरावट दर्ज।
2018-19 के बाद दर संशोधन से मार्केट रेट और गाइडलाइन रेट के अंतर को कम करने की कोशिश, पारदर्शिता पर जोर।
रायपुर/ छत्तीसगढ़ में जमीन-जायदाद की गाइडलाइन दरों में हालिया संशोधन का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। दरों में बढ़ोतरी के बाद रजिस्ट्री शुल्क महंगा होने से संपत्ति पंजीयन की रफ्तार धीमी पड़ी है। इसका सीधा प्रभाव राज्य के राजस्व पर पड़ा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में पंजीयन विभाग को अपेक्षित आय नहीं मिल सकी और राजस्व में गिरावट दर्ज की गई है।
आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच राज्य को पंजीयन से कुल 1960.05 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। जबकि पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 2978.58 करोड़ रुपये था। तुलना करने पर लगभग 4.10 प्रतिशत की कमी सामने आई है। राजस्व में यह गिरावट राज्य सरकार के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है।
सिर्फ राजस्व ही नहीं, बल्कि पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। चालू वित्तीय वर्ष में 31 दिसंबर तक कुल 2.04 लाख दस्तावेज पंजीकृत हुए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 3.21 लाख थी। यानी करीब 10.20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। बीते एक दशक में पहली बार रजिस्ट्री की संख्या में इतनी बड़ी गिरावट देखी गई है।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने लगभग सात से आठ वर्षों बाद गाइडलाइन दरों में संशोधन किया। वर्ष 2018-19 की दरें लंबे समय से लागू थीं, जबकि इस दौरान बाजार मूल्य और शहरी विकास में काफी बदलाव आ चुका था। मार्केट रेट और गाइडलाइन रेट के बीच बढ़ते अंतर से कच्चे लेन-देन और वास्तविक सौदे की राशि छिपाने की प्रवृत्ति बढ़ने की आशंका थी। ग्रामीण क्षेत्रों में हेक्टेयर दर और वर्गमीटर दरों में असमानता भी विवाद का कारण बन रही थी।
इन विसंगतियों को दूर करने के उद्देश्य से 20 नवंबर 2025 से नई गाइडलाइन दरें लागू की गईं। साथ ही कई पुराने और अनावश्यक प्रावधानों में संशोधन कर व्यवस्था को पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया।
पंजीयन विभाग से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना मार्च निर्णायक साबित हो सकता है। जनवरी और फरवरी 2026 के आंकड़े अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं, लेकिन विभाग को उम्मीद है कि मार्च में रजिस्ट्री की संख्या बढ़ेगी और राजस्व में आई कमी की आंशिक भरपाई हो सकेगी।