राष्ट्रपति मुर्मु बोलीं: कृषि विकास में महिलाओं का नेतृत्व जरूरी

Thu 12-Mar-2026,03:33 PM IST +05:30

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राष्ट्रपति मुर्मु बोलीं: कृषि विकास में महिलाओं का नेतृत्व जरूरी Women-Role-Agriculture-GCWAS-2026-Droupadi-Murmu
  • कृषि विश्वविद्यालयों में छात्राओं की बढ़ती संख्या से स्पष्ट है कि युवा महिलाएं कृषि क्षेत्र में नेतृत्व और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

  • महिला किसानों को भूमि स्वामित्व, तकनीकी ज्ञान, वित्तीय संसाधन और नीतिगत निर्णयों में भागीदारी देकर कृषि विकास को अधिक समावेशी बनाया जा सकता है।

Delhi / New Delhi :

New Delhi/ भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने नई दिल्ली में आयोजित कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर आयोजित वैश्विक सम्मेलन GCWAS-2026 के उद्घाटन सत्र में भाग लिया और महिला किसानों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी से लेकर प्रसंस्करण और बाजार तक फसलों को पहुंचाने में महिलाएं बड़ी भूमिका निभाती हैं। राष्ट्रपति ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं को नेतृत्व देने, समान अवसर प्रदान करने और नीतिगत निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

नई दिल्ली में आयोजित वैश्विक सम्मेलन Global Conference on Women in Agrifood Systems 2026 के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं का योगदान अमूल्य है। उन्होंने कहा कि खेती से जुड़ी लगभग हर गतिविधि—जैसे बुवाई, कटाई, प्रसंस्करण और फसलों को बाजार तक पहुंचाने—में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके अलावा मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, पशुपालन, वन उत्पादों के उपयोग और कृषि आधारित उद्यमों के संचालन में भी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखी जाती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि कृषि अर्थव्यवस्था में महिलाओं के योगदान को उचित पहचान और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि देश के कृषि विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों में लड़कियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कई कृषि विश्वविद्यालयों में कुल छात्रों में 50 प्रतिशत से अधिक छात्राएं हैं और कुछ संस्थानों में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से भी अधिक है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह सकारात्मक संकेत है कि युवा महिलाएं कृषि क्षेत्र में अपना भविष्य देख रही हैं।

उन्होंने सरकार, समाज और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों से अपील की कि इन प्रतिभाशाली छात्राओं को कृषि और खाद्य उत्पादन के क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। राष्ट्रपति ने कहा कि नेतृत्व की क्षमता महिलाओं में स्वाभाविक रूप से मौजूद होती है, लेकिन अक्सर समाज में मातृत्व की भूमिका को केवल घरेलू दायरे तक सीमित समझ लिया जाता है। इस सोच को बदलने की आवश्यकता है ताकि महिलाएं कृषि क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका निभा सकें।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2026 को International Year of Women Farmers 2026 के रूप में घोषित किया है। इस पहल का उद्देश्य कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं में मौजूद लैंगिक असमानताओं को कम करना और महिलाओं के लिए नेतृत्व के अवसर बढ़ाना है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत आज महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में कृषि क्षेत्र में नीति निर्माण, निर्णय लेने और नेतृत्व पदों पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिला किसानों को भूमि स्वामित्व, तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय संसाधनों और अन्य सहायता प्रणालियों तक बेहतर पहुंच मिलनी चाहिए।

उन्होंने इस बात पर भी संतोष व्यक्त किया कि पिछले एक दशक में भारत सरकार ने महिला किसानों को सशक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें की हैं। महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हुई है।

राष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अब यह सहमति बन चुकी है कि विकास के लिए लोगों, पृथ्वी, समृद्धि, शांति और साझेदारी जैसे पांच महत्वपूर्ण आयामों को समान महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने सभी हितधारकों से आग्रह किया कि विकास के हर क्षेत्र में महिला-पुरुष समानता को प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने विश्वास जताया कि इस वैश्विक सम्मेलन में होने वाली चर्चा और विचार-विमर्श से टिकाऊ और समावेशी कृषि-खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा मिलेगा तथा महिला किसानों की भूमिका को और अधिक मजबूत बनाने के लिए नए रास्ते खुलेंगे।

यह तीन दिवसीय सम्मेलन विभिन्न संस्थानों जैसे Indian Council of Agricultural Research, CGIAR और Protection of Plant Varieties and Farmers’ Rights Authority के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और टिकाऊ कृषि विकास में महिलाओं की भूमिका को वैश्विक स्तर पर रेखांकित करना है।