देश के किसानों पर 31 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज, तमिलनाडु सबसे आगे

Mon 16-Mar-2026,12:02 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

देश के किसानों पर 31 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज, तमिलनाडु सबसे आगे India Farmers Debt
  • देश के किसानों पर कुल 31 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज।

  • तमिलनाडु किसानों के कर्ज के मामले में देश में सबसे आगे।

  • बढ़ती लागत और कम कीमतें किसानों की आर्थिक समस्या बढ़ा रहीं।

Tamil Nadu / Chennai :

Chennai / भारत में कृषि क्षेत्र लंबे समय से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है और हाल ही में सामने आए सरकारी आंकड़ों ने इस संकट की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया है। केंद्र सरकार के अनुसार देश के किसानों पर कुल 31,34,807.42 करोड़ रुपये का कर्ज है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत देता है कि खेती से जुड़ी आर्थिक अस्थिरता और बढ़ती लागत ने किसानों पर भारी वित्तीय दबाव डाल दिया है। आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक कर्ज दक्षिण भारत के राज्य Tamil Nadu के किसानों पर है, जहां किसानों का कुल कर्ज 5,06,290.45 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसमें 1,65,075.79 करोड़ रुपये का क्रॉप लोन और 3,41,214.66 करोड़ रुपये का टर्म लोन शामिल है। क्रॉप लोन आमतौर पर एक साल की अवधि के लिए दिया जाता है, जिसका उपयोग किसान बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि कार्यों के लिए करते हैं। वहीं टर्म लोन लंबी अवधि के लिए होता है, जिसका उपयोग ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि मशीनरी खरीदने या कृषि से जुड़े स्थायी निवेश के लिए किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और बाजार में उचित कीमत न मिलने के कारण किसानों को बार-बार कर्ज लेना पड़ता है, जिससे कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

आंकड़ों के अनुसार किसानों पर कर्ज के मामले में Andhra Pradesh दूसरे स्थान पर है, जहां कुल कर्ज 3,75,254.59 करोड़ रुपये है। इसके बाद Maharashtra में किसानों पर 3,07,293.71 करोड़ रुपये का कर्ज दर्ज किया गया है। देश के सबसे बड़े राज्यों में शामिल Uttar Pradesh में किसानों का कुल कर्ज 2,30,096.69 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जबकि Karnataka में यह आंकड़ा 2,10,244.47 करोड़ रुपये है। कृषि अर्थशास्त्रियों के अनुसार यह स्थिति केवल वित्तीय समस्या नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। कई मामलों में किसानों की आय इतनी स्थिर नहीं होती कि वे समय पर कर्ज चुका सकें। ऐसे में ब्याज बढ़ता जाता है और कर्ज का बोझ और भारी हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई किसानों के लिए यह कर्ज चुकाना इतना कठिन हो जाता है कि इसके निपटारे में कई पीढ़ियां लग सकती हैं। यह स्थिति भारतीय कृषि क्षेत्र में मौजूद आर्थिक तनाव और संरचनात्मक समस्याओं को उजागर करती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या के समाधान के लिए केवल कर्ज माफी पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने जैसे दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता है। जब तक खेती को आर्थिक रूप से अधिक स्थिर और लाभकारी नहीं बनाया जाएगा, तब तक किसानों के कर्ज का संकट पूरी तरह समाप्त होना मुश्किल माना जा रहा है।