सड़कें बनेंगी कमाई का जरिया: सिटीयस ट्रांसनेट का बड़ा निवेश अवसर
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Infrastructure Investment Trust
17-21 अप्रैल 2026 तक खुला रहेगा इश्यू.
₹99-100 प्राइस बैंड, ₹11,050 करोड़ जुटाने का लक्ष्य.
रोड प्रोजेक्ट्स से स्थिर आय का अवसर.
Mumbai / इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के क्षेत्र में एक नया अवसर सामने आ रहा है। सिटीयस ट्रांसनेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट अपना बहुप्रतीक्षित इश्यू 17 अप्रैल 2026 को खोलने जा रहा है, जो 21 अप्रैल 2026 तक निवेशकों के लिए खुला रहेगा। इस इश्यू का प्राइस बैंड ₹99 से ₹100 प्रति यूनिट तय किया गया है, जो इसे रिटेल और संस्थागत निवेशकों दोनों के लिए आकर्षक बनाता है। यह ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर केंद्रित एक इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट है, जिसका उद्देश्य भारत में सड़कों जैसे इंफ्रा एसेट्स में निवेश कर स्थिर रिटर्न देना है। इस इश्यू के जरिए ट्रस्ट लगभग ₹11,050 करोड़ जुटाने की योजना में है।
निवेशकों के लिए न्यूनतम बोली 150 यूनिट्स की रखी गई है और उसके बाद उसी के मल्टीपल में निवेश किया जा सकता है। यह संरचना छोटे निवेशकों को भी इंफ्रा सेक्टर में भागीदारी का मौका देती है। ट्रस्ट के वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें तो पिछले कुछ वर्षों में लगातार वृद्धि देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2025 में ट्रस्ट की ऑपरेशन्स से आय ₹19,870.46 मिलियन रही, जो 2023 के ₹17,735.16 मिलियन से काफी अधिक है। वहीं ऑपरेटिंग कैश फ्लो भी ₹10,449.52 मिलियन तक पहुंच गया है।
दिसंबर 2025 तक नौ महीनों में ही ₹14,963.64 मिलियन का रेवेन्यू और ₹7,820.15 मिलियन का कैश फ्लो ट्रस्ट की मजबूत फाइनेंशियल स्थिति को दर्शाता है। इश्यू के बाद ट्रस्ट के पास 10 रोड प्रोजेक्ट्स का एक मजबूत पोर्टफोलियो होगा, जिसमें टोल और एन्युटी दोनों प्रकार के एसेट्स शामिल हैं। कुल मिलाकर ये प्रोजेक्ट्स 3,406.71 लेन-किलोमीटर में फैले हैं और देश के 9 राज्यों में मौजूद हैं। इन एसेट्स की एडजस्टेड एंटरप्राइज वैल्यू दिसंबर 2025 तक करीब ₹120,588 मिलियन आंकी गई है, जो इसकी स्केल और क्षमता को दर्शाती है।
सिटीयस ट्रांसनेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट उन निवेशकों के लिए खास अवसर हो सकता है जो लंबी अवधि में स्थिर आय और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की ग्रोथ का फायदा उठाना चाहते हैं। सड़क परियोजनाओं से नियमित टोल और एन्युटी इनकम इस तरह के निवेश को अपेक्षाकृत स्थिर बनाती है। कुल मिलाकर, यह इश्यू भारत के तेजी से बढ़ते इंफ्रा सेक्टर में भागीदारी का एक मजबूत माध्यम बनकर सामने आ रहा है—जहां सड़कें सिर्फ सफर नहीं, बल्कि निवेश का रास्ता भी बन रही हैं।
(अनिल बेदाग)