शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 588 अंक टूटा
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हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 588 अंक और निफ्टी करीब 180 अंक गिरकर लाल निशान में बंद।
विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजारों के कमजोर संकेत और आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशक सतर्क हैं, आने वाले दिनों में वैश्विक संकेत बाजार की दिशा तय करेंगे।
मुंबई/ हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। कारोबार की शुरुआत से ही बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जो पूरे दिन जारी रहा। प्रमुख सूचकांक BSE Sensex करीब 588 अंक गिरकर नीचे बंद हुआ, जबकि Nifty 50 लगभग 180 अंकों की गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत और विदेशी निवेशकों की बिकवाली को गिरावट का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
कारोबार की शुरुआत में ही निवेशकों में सतर्कता का माहौल देखने को मिला। शुरुआती सत्र में बाजार ने हल्की कमजोरी के साथ शुरुआत की, लेकिन कुछ ही देर में बिकवाली तेज हो गई। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा, लेकिन अंत में दोनों प्रमुख सूचकांक भारी गिरावट के साथ बंद हुए।
बाजार में आईटी, बैंकिंग और मेटल सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। इन क्षेत्रों की बड़ी कंपनियों के शेयरों में लगातार गिरावट के कारण बाजार पर दबाव बना रहा। कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में 2 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता और आर्थिक संकेतकों को लेकर निवेशकों में चिंता बनी हुई है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा की गई लगातार बिकवाली ने भी बाजार की गिरावट को तेज कर दिया।
विश्लेषकों के मुताबिक निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं और बड़े निवेश से बच रहे हैं। इसके कारण बाजार में खरीदारी की तुलना में बिकवाली ज्यादा देखने को मिली। बाजार में कमजोरी का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी पड़ा, जहां कई शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में भी बड़ी कमी आई। बाजार में गिरावट के चलते कई कंपनियों के मार्केट कैप में कमी आई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी भी हो सकती है और बाजार आगे आने वाले आर्थिक आंकड़ों तथा वैश्विक संकेतों के आधार पर नई दिशा तय करेगा।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को ऐसे समय में घबराने के बजाय सतर्क रणनीति अपनानी चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। साथ ही वैश्विक बाजारों की स्थिति, ब्याज दरों के संकेत और आर्थिक आंकड़ों पर नजर रखना जरूरी होगा।
आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।