ATM से नहीं निकले पैसे, फिर भी कटे 10 हजार… 9 साल बाद मिला 3.28 लाख मुआवजा
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Surat ATM Case
एटीएम से पैसा नहीं निकला, खाते से कटे 10,000 रुपये.
9 साल बाद उपभोक्ता को मिला न्याय और मुआवजा.
बैंक की लापरवाही पर आयोग ने सुनाया सख्त फैसला.
Surat / गुजरात के Surat में एटीएम ट्रांजैक्शन से जुड़ा एक मामला लंबे संघर्ष के बाद उपभोक्ता के पक्ष में गया है। वर्ष 2017 में हुई इस घटना में एक ग्राहक ने एटीएम से 10,000 रुपये निकालने की कोशिश की थी, लेकिन मशीन से नकद राशि नहीं निकली, जबकि उसके खाते से पैसे डेबिट हो गए। यह ट्रांजैक्शन State Bank of India के एटीएम से किया गया था, जबकि ग्राहक का खाता Bank of Baroda में था। पैसे कटने के बाद ग्राहक ने तुरंत बैंक से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। शुरुआत में उसे भरोसा दिलाया गया कि समस्या का समाधान जल्द कर दिया जाएगा, लेकिन समय बीतने के साथ मामला उलझता चला गया। ग्राहक ने कई बार बैंक अधिकारियों से संपर्क किया, ईमेल भेजे और लिखित शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद ग्राहक ने सूचना प्राप्त करने के लिए Right to Information Act के तहत आवेदन किया और मामले को आगे बढ़ाते हुए Reserve Bank of India तक भी पहुंचाया। इसके बावजूद लंबे समय तक उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्राहक का कहना था कि बैंक ने उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और लगातार जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की। अंततः कई वर्षों तक परेशान रहने के बाद उसने न्याय पाने के लिए उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा ने यह तर्क दिया कि एटीएम मशीन एसबीआई की थी और उनके सिस्टम में ट्रांजैक्शन सफल दिख रहा था, इसलिए इस मामले में उनकी जिम्मेदारी नहीं बनती। हालांकि ग्राहक ने अपने सभी दस्तावेज, शिकायतों का रिकॉर्ड और बैंक से हुई बातचीत के सबूत आयोग के सामने पेश किए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वह लगातार अपने पैसे वापस पाने के लिए प्रयास कर रहा था।
मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद उपभोक्ता आयोग ने बैंक के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि ग्राहक के साथ हुई इस घटना की जिम्मेदारी से बैंक बच नहीं सकता। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि किसी ग्राहक के खाते से राशि कटती है, तो ट्रांजैक्शन का पूरा और ठोस प्रमाण देना संबंधित बैंक की जिम्मेदारी होती है। आयोग ने यह भी कहा कि Reserve Bank of India के दिशा-निर्देशों के अनुसार यदि एटीएम से पैसा नहीं निकलता और राशि खाते से कट जाती है, तो बैंक को पांच दिनों के भीतर ग्राहक के खाते में वह राशि वापस करनी होती है। लेकिन इस मामले में बैंक ने यह नियम नहीं माना और ग्राहक को वर्षों तक परेशान होना पड़ा। आयोग ने माना कि बैंक की लापरवाही और देरी के कारण ग्राहक को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी झेलना पड़ा। इसलिए आयोग ने आदेश दिया कि बैंक ग्राहक को 10,000 रुपये की मूल राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। इसके अलावा आयोग ने 3,288 दिनों की देरी के लिए 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 3,28,800 रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया। इस तरह कुल मिलाकर बैंक को ग्राहक को 3.28 लाख रुपये से अधिक की राशि अदा करनी होगी। यह फैसला बैंकिंग सेवाओं में जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि यदि किसी ग्राहक के साथ एटीएम या बैंकिंग सेवा में गड़बड़ी होती है और बैंक समय पर समाधान नहीं करता, तो उपभोक्ता कानून के तहत ग्राहक न्याय प्राप्त कर सकता है। साथ ही यह फैसला बैंकों को भी चेतावनी देता है कि वे ग्राहकों की शिकायतों को गंभीरता से लें और निर्धारित समय सीमा के भीतर उनका समाधान करें, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके और बैंकिंग प्रणाली पर लोगों का भरोसा बना रहे।