फांसी घर मामला: 6 मार्च को प्रिविलेज कमेटी के सामने पेश होंगे अरविंद केजरीवाल, लाइव स्ट्रीमिंग की मांग

Tue 03-Mar-2026,11:20 PM IST +05:30

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फांसी घर मामला: 6 मार्च को प्रिविलेज कमेटी के सामने पेश होंगे अरविंद केजरीवाल, लाइव स्ट्रीमिंग की मांग Arvind Kejriwal Privilege Committee
  • 6 मार्च को प्रिविलेज कमेटी के सामने पेश होंगे केजरीवाल.

  • कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग की मांग.

  • बीजेपी ने लगाया धन दुरुपयोग का आरोप.

Delhi / Delhi :

Delhi / दिल्ली विधानसभा में कथित ‘फांसी घर’ मामले को लेकर सियासत एक बार फिर गर्म हो गई है। जारी समन के अनुसार आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 6 मार्च को विधानसभा की प्रिविलेज कमेटी के सामने पेश होंगे। इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए समिति को लिखे अपने पत्र की जानकारी दी।

अपने पोस्ट में केजरीवाल ने लिखा कि दिल्ली इस समय प्रदूषण, टूटी सड़कों, कूड़े के ढेर और अस्पतालों में दवाइयों की कमी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय उन्हें फांसी घर से जुड़े प्रश्न पर बुलाया गया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति के समन का सम्मान करते हुए वह 6 मार्च को दोपहर 3 बजे तय स्थान पर कमेटी ऑफ प्रिविलेज के सामने उपस्थित होंगे।

केजरीवाल ने अपने पत्र में विधानसभा के रूल्स ऑफ प्रोसीजर एंड कंडक्ट ऑफ बिजनेस के रूल 172 और 220 का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें नोटिस मिल चुका है और वह नियमानुसार पेश होंगे। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी उपस्थिति से उनके कानूनी और संवैधानिक अधिकारों, आपत्तियों और दलीलों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जिन्हें उन्होंने सुरक्षित रखा है।

पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही का हवाला देते हुए केजरीवाल ने समिति से कार्यवाही का सीधा प्रसारण (लाइव-स्ट्रीमिंग) करने की मांग की है। उनका कहना है कि जनता के हित में पूरी प्रक्रिया खुली और पारदर्शी होनी चाहिए।

यह मामला अगस्त 2020 से जुड़ा है, जब आम आदमी पार्टी सरकार ने विधानसभा परिसर में एक संरचना का उद्घाटन करते हुए उसे ब्रिटिश काल का ‘फांसी घर’ बताया था। बीजेपी ने उस समय इस दावे का विरोध करते हुए कहा था कि वह ढांचा फांसी घर नहीं, बल्कि पुराना टिफिन रूम था। बीजेपी का आरोप है कि जनता को गुमराह किया गया और संरचना के नवीनीकरण में सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ।

इसी आरोप की जांच के लिए विशेषाधिकार समिति का गठन किया गया है। अब केजरीवाल की पेशी को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। एक तरफ आम आदमी पार्टी इसे पारदर्शिता का मुद्दा बना रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी इसे तथ्यों और जवाबदेही से जुड़ा मामला बता रही है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि समिति की कार्यवाही किस दिशा में जाती है और इसका दिल्ली की राजनीति पर क्या असर पड़ता है। फिलहाल, 6 मार्च की तारीख पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।