राजनाथ सिंह ने जारी किया सेना के लिए विजन 2047 रोडमैप

Tue 10-Mar-2026,03:53 PM IST +05:30

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राजनाथ सिंह ने जारी किया सेना के लिए विजन 2047 रोडमैप Rajnath-Singh-Vision-2047-Indian-Armed-Forces
  • विजन 2047 में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, स्वदेशी रक्षा तकनीकों के विकास और घरेलू रक्षा विनिर्माण को मजबूत करने को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम बताया गया।

  • दस्तावेज में तीनों सेनाओं के बीच समन्वय, उन्नत तकनीक, आधुनिक प्रशिक्षण और संगठनात्मक सुधारों के जरिए भविष्य की युद्ध चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर जोर दिया गया।

Delhi / New Delhi :

नई दिल्ली/ रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने मंगलवार को नई दिल्ली के South Block में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान “रक्षा बलों के लिए विजन 2047: भविष्य के लिए तैयार भारतीय सेना का रोडमैप” जारी किया। यह व्यापक दस्तावेज एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय द्वारा तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों को आधुनिक, तकनीकी रूप से उन्नत और समन्वित सेना में परिवर्तित करना है।

यह दृष्टिकोण पत्र भारत के विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ तैयार किया गया है, जिसके तहत 2047 तक देश की सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए रक्षा बलों की संरचना और क्षमता को मजबूत करने की योजना बनाई गई है। इसमें भू-रणनीतिक परिस्थितियों, तेजी से बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और उभरती तकनीकों के अनुरूप सैन्य सुधारों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।

दस्तावेज में बताया गया है कि आने वाले वर्षों में भारतीय रक्षा बलों को अधिक समन्वित और प्रभावी बनाने के लिए संगठनात्मक सुधार किए जाएंगे। इसके तहत सेना के तीनों अंगों—थल सेना, नौसेना और वायुसेना—के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय पर विशेष जोर दिया गया है। इससे योजना निर्माण, सैन्य संचालन और क्षमता विकास में अधिक दक्षता आएगी।

इस रोडमैप का एक प्रमुख उद्देश्य भविष्य की युद्ध चुनौतियों के अनुरूप सशस्त्र बलों को तैयार करना है। इसके लिए नवाचार, अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग और आधुनिक प्रशिक्षण प्रणाली को अपनाने पर जोर दिया गया है। दस्तावेज में यह भी उल्लेख किया गया है कि आधुनिक युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तकनीक और उन्नत रक्षा प्रणालियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।

विजन 2047 दस्तावेज में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत स्वदेशी तकनीकों और रक्षा प्रणालियों के विकास को प्रोत्साहन दिया जाएगा ताकि भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों को घरेलू संसाधनों से पूरा कर सके। इससे देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।

दस्तावेज में अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक लक्ष्यों के आधार पर रक्षा क्षमता के विकास की योजना तैयार की गई है। इस सुव्यवस्थित रणनीति के माध्यम से सैन्य क्षमताओं, संस्थागत सुधारों और रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।

कार्यक्रम में Anil Chauhan, Dinesh K Tripathi, A. P. Singh और रक्षा सचिव Rajesh Kumar Singh सहित कई वरिष्ठ सैन्य और सरकारी अधिकारी उपस्थित रहे।

सरकार का मानना है कि यह दृष्टिकोण पत्र राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सैन्य शक्ति को कूटनीतिक, तकनीकी और आर्थिक क्षमताओं के साथ जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक भारतीय सशस्त्र बल विश्व स्तर पर सम्मानित, तकनीकी रूप से उन्नत और युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार सेना के रूप में स्थापित हो सकें।