राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026: आयुष ने बढ़ाया स्वास्थ्य व किसान सशक्तिकरण
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औषधीय फसलों की सुनिश्चित खरीद और बाय-बैक समझौतों से किसानों की आय बढ़ाने और आयुष उद्योग को सशक्त करने की पहल।
आयुष राज्य मंत्री ने जीवनशैली रोगों की रोकथाम, योग, आयुर्वेदिक घरेलू उपचार और अनुशासित दिनचर्या को स्वस्थ भारत की कुंजी बताया।
New Delhi/ महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के शेगांव में 25 से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित National Arogya Mela 2026 में आयुष मंत्रालय ने एक भव्य और ज्ञानवर्धक पवेलियन के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य देखभाल का व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। यह पवेलियन निवारक, प्रोत्साहक और एकीकृत चिकित्सा प्रणाली को बढ़ावा देने के साथ-साथ औषधीय पौधों की खेती से ग्रामीण आजीविका सशक्त बनाने की दिशा में मंत्रालय की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। मेले में बड़ी संख्या में किसान, चिकित्सक, विद्यार्थी और आम नागरिक भाग ले रहे हैं।
दूसरे दिन आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Prataprao Jadhav ने सभा को संबोधित करते हुए जीवनशैली संबंधी रोगों की रोकथाम में आयुष पद्धतियों की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से बचाव के लिए अनुशासित दिनचर्या, समय पर सोना और जल्दी उठने की आदत अपनाने की अपील की। उन्होंने पारंपरिक घरेलू उपचारों और “आजी बाई का बटुआ” जैसी अवधारणाओं को ग्राम स्तर पर किफायती स्वास्थ्य मॉडल बताया।
अनुसंधान और जनजागरूकता पर जोर
आयुष मंत्रालय के पवेलियन में विभिन्न अनुसंधान परिषदों, राष्ट्रीय संस्थानों और National Medicinal Plants Board की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। यहां आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी से जुड़े अनुसंधान कार्य, शैक्षणिक कार्यक्रम और नैदानिक सेवाओं की जानकारी दी जा रही है।
डिजिटल डिस्प्ले, औषधीय पौधों की प्रदर्शनी और सूचना-शिक्षा-संचार (IEC) सामग्री के माध्यम से आमजन को आयुष योजनाओं और साक्ष्य-आधारित उपलब्धियों से अवगत कराया जा रहा है।
निःशुल्क चिकित्सा परामर्श और योग सत्र
योग्य चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क परामर्श और प्रामाणिक आयुष औषधियों का वितरण किया जा रहा है। लाइव योग प्रदर्शन और योग चिकित्सा सत्रों में भारी भागीदारी इस बात का संकेत है कि योग न केवल निवारक बल्कि पुनर्स्थापनात्मक स्वास्थ्य का भी प्रभावी माध्यम है। एक विशेष आयुष आहार खंड संतुलित और क्षेत्र-विशिष्ट पोषण पर आधारित आहार पद्धतियों को बढ़ावा दे रहा है।
किसानों के लिए औषधीय खेती के अवसर
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के विशेष स्टॉल ने किसानों और कृषि उद्यमियों का ध्यान आकर्षित किया। औषधीय पौधों की खेती, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, फसल कटाई के बाद प्रबंधन और बाजार संपर्क पर विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यशाला में लगभग 2000 किसानों ने भाग लिया और नौ आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें से एक महत्वपूर्ण समझौता हल्दी की 100 मीट्रिक टन सुनिश्चित खरीद को लेकर हुआ, जिसमें बाय-बैक व्यवस्था और स्थिर मूल्य निर्धारण सुनिश्चित किया गया। इससे हल्दी, अदरक, शतावरी और एलोवेरा जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की दिशा में कदम
मंत्री जाधव ने भारत को औषधीय पौधों के कच्चे माल का विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनाने के लिए संगठित बाजार, गुणवत्ता मानक और संस्थागत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेश कुमार दाधिच ने केंद्रीय क्षेत्र योजना की जानकारी देते हुए किसानों को सतत खेती और संरक्षण के महत्व से अवगत कराया। इस प्रकार, राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 आयुष प्रणालियों के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य, ग्रामीण सशक्तिकरण और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में एक सशक्त मंच बनकर उभरा है।