निर्माण उपकरण वित्त सम्मेलन 2026: एचडी कुमारस्वामी ने मजबूत फाइनेंसिंग से ‘विकसित भारत 2047’ को दी रफ्तार
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Construction Equipment Finance Conference
12.2 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक पूंजीगत व्यय.
निर्माण उपकरण बाजार 2030 तक दोगुना होने का अनुमान.
एआई और इलेक्ट्रिक तकनीकों से क्षेत्र में बदलाव.
Delhi / केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित छठे वार्षिक निर्माण उपकरण वित्त सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा कि भारत की अवसंरचना और विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं को नई ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए एक मजबूत और लचीली वित्तपोषण व्यवस्था बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि निर्माण उपकरण क्षेत्र केवल विकास का सहभागी नहीं, बल्कि देश की विकास गाथा का निर्माता है।
सम्मेलन का विषय — “एक लचीली अवसंरचना और निर्माण उपकरण वित्तपोषण इकोसिस्टम का निर्माण: वैश्विक पहुंच के लिए घरेलू निर्माण” — को उन्होंने भारत की वर्तमान आर्थिक दिशा के अनुरूप बताया। कुमारस्वामी ने कहा कि भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। यह प्रगति मजबूत बुनियादी ढांचे, विनिर्माण विस्तार और निरंतर पूंजी निवेश का परिणाम है।
बुनियादी ढांचे में ऐतिहासिक निवेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बुनियादी ढांचे पर बढ़ते निवेश का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार केवल सड़कों और पुलों का निर्माण नहीं कर रही, बल्कि विकसित भारत 2047 की ठोस नींव रख रही है। केंद्रीय बजट 2026-27 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक प्रावधान इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि यह निवेश राजमार्गों, रेलवे, लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर, बंदरगाहों, नवीकरणीय ऊर्जा और शहरी विस्तार जैसे क्षेत्रों में संरचनात्मक बदलाव लाएगा। इसके साथ ही निर्माण उपकरण उद्योग को भी व्यापक अवसर मिलेंगे।
निर्माण उपकरण क्षेत्र का बढ़ता बाजार
कुमारस्वामी ने बताया कि भारतीय निर्माण उपकरण बाजार का वर्तमान आकार लगभग 9.5 अरब डॉलर है, जो 2030 तक दोगुने से अधिक होने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2025 में इस क्षेत्र में 1,40,000 से अधिक इकाइयों की बिक्री हुई, और दशक के अंत तक इसे 25 अरब डॉलर के बाजार में बदलने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने निर्माण और अवसंरचना उपकरण (CIE) संवर्धन के लिए प्रस्तावित योजना का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य उच्च मूल्य और तकनीकी रूप से उन्नत उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। यह पहल भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती देगी और आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगी।
उभरती तकनीकों का प्रभाव
मंत्री ने कहा कि स्वचालन, एआई-सक्षम फ्लीट प्रबंधन, पूर्वानुमानित रखरखाव और इलेक्ट्रिक तथा हाइब्रिड उपकरण इस क्षेत्र की कार्यप्रणाली को बदल रहे हैं। पीएम ई-ड्राइव जैसी पहलें स्वच्छ और टिकाऊ औद्योगिक विकास को गति दे रही हैं। उनका मानना है कि नई तकनीकों को अपनाने से परिचालन लागत घटेगी और उत्पादकता बढ़ेगी।
मजबूत वित्तपोषण का बहुगुणक प्रभाव
कुमारस्वामी ने जोर देकर कहा कि निर्माण उपकरण क्षेत्र में एक सुदृढ़ वित्तपोषण ढांचा पूरे आर्थिक तंत्र को गति देगा। इससे केवल बड़े निर्माता ही नहीं, बल्कि ठेकेदारों, एमएसएमई, लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों और अवसंरचना डेवलपर्स को भी लाभ होगा। उन्होंने उद्योग और वित्तीय संस्थानों से सहयोग बढ़ाने की अपील की।
वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में कदम
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सभी हितधारकों से सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया, ताकि भारत निर्माण उपकरण विनिर्माण और वित्तपोषण का वैश्विक केंद्र बन सके। उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभा, बाजार और नीतिगत समर्थन तीनों मौजूद हैं — अब जरूरत है एकीकृत प्रयासों की।
कुमारस्वामी ने विश्वास जताया कि यदि उद्योग, सरकार और वित्तीय संस्थान मिलकर काम करें, तो निर्माण उपकरण क्षेत्र भारत की विकास यात्रा में निर्णायक भूमिका निभाएगा और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।