भैरूंदा में वीर तेजाजी प्रतिमा का लोकार्पण

Sat 28-Feb-2026,05:07 PM IST +05:30

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भैरूंदा में वीर तेजाजी प्रतिमा का लोकार्पण Veer-Tejaji-Statue-Unveiling-Bhairunda
  • भैरूंदा में वीर तेजाजी की आदमकद प्रतिमा का लोकार्पण केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा श्रद्धापूर्वक किया गया।

  • समारोह में महापुरुषों के आदर्शों को अपनाने और समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश दिया गया।

Madhya Pradesh / Indore :

Bhairunda/ मध्यप्रदेश के भैरूंदा में वीर तेजाजी की आदमकद प्रतिमा का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। इंदौर मार्ग स्थित मेन रोड पर स्थापित इस प्रतिमा का अनावरण केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों की बड़ी भागीदारी रही। समारोह श्रद्धा, गौरव और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बना, जहां वीर तेजाजी के त्याग, पराक्रम और सत्यनिष्ठा को स्मरण करते हुए समाज में नैतिक मूल्यों को सशक्त करने का संदेश दिया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वीर तेजाजी जैसे महापुरुषों का जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने उनके पराक्रम, त्याग और सत्यनिष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ता है जब वह अपने इतिहास और नायकों को स्मरण रखता है।

केंद्रीय मंत्री ने प्रतिमा के समक्ष नमन करते हुए कहा कि जीवन क्षणभंगुर है और एक दिन सबको इस संसार से जाना है, लेकिन प्रयास ऐसा होना चाहिए कि हमारे कर्म और मूल्य समाज में सकारात्मक प्रभाव छोड़ें। उन्होंने यह भी कहा कि वीर तेजाजी ने सत्य के मार्ग पर चलकर जो उदाहरण प्रस्तुत किया, वह आज की युवा पीढ़ी के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक है।

मीडिया से चर्चा में उन्होंने कहा कि वीर तेजाजी का बलिदान और तपस्या केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि वर्तमान समाज के लिए मार्गदर्शक है। उनके जीवन से सत्य, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश मिलता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में नैतिक मूल्यों को सर्वोपरि रखें और समाज सेवा को अपना लक्ष्य बनाएं।

कार्यक्रम के दौरान स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। प्रतिमा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और पूरे आयोजन में उत्साह और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत के प्रति सम्मान का प्रतीक बनकर उभरा।