केंद्र ने असम की पंचायतों को 256.60 करोड़ रुपये का अनुदान जारी, 15वें वित्त आयोग की राशि वितरित
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Assam Panchayat Grant
असम की पंचायतों को 15वें वित्त आयोग के तहत 256.60 करोड़ रुपये का अनुदान।
जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायतों सहित स्वायत्त परिषदों को लाभ।
स्वच्छता, पेयजल और ग्रामीण विकास कार्यों को मिलेगा बढ़ावा।
Guwahati / केंद्र सरकार ने असम के पंचायती राज संस्थानों और ग्रामीण स्थानीय निकायों को मजबूत बनाने के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के तहत 15वें वित्त आयोग की अनुदान राशि जारी की है। इस अनुदान के तहत बिना शर्त अनुदान की दूसरी किस्त के रूप में 256.60 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इस राशि का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देना और स्थानीय निकायों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाना है।
जारी की गई यह धनराशि असम की सभी पात्र पंचायत संस्थाओं को दी जाएगी। इसमें राज्य की 27 जिला पंचायतें (डीपी), 182 ब्लॉक पंचायतें (बीपी), 2192 ग्राम पंचायतें (जीपी) और तीन स्वायत्त जिला परिषदें शामिल हैं। इन स्वायत्त परिषदों में बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC), कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (KAAC) और दीमा हसाओ स्वायत्त परिषद (DHAC) शामिल हैं। इसके अलावा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिना शर्त अनुदान की पहली किस्त के रोके गए 42.70 करोड़ रुपये भी इन तीनों स्वायत्त परिषदों को जारी कर दिए गए हैं।
केंद्र सरकार की ओर से जारी यह अनुदान ग्रामीण विकास और स्थानीय शासन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस धनराशि के माध्यम से पंचायतों को अपने क्षेत्र की स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
भारत सरकार पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय के माध्यम से राज्यों को 15वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के आधार पर अनुदान जारी करती है। इन अनुदानों को वित्त मंत्रालय द्वारा स्वीकृत किया जाता है। आमतौर पर एक वित्तीय वर्ष में यह राशि दो किस्तों में राज्यों को दी जाती है ताकि विकास कार्यों का क्रियान्वयन व्यवस्थित तरीके से किया जा सके।
बिना शर्त यानी अप्रतिबंधित अनुदान का उपयोग पंचायत संस्थाएं संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में शामिल 29 विषयों से संबंधित स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कर सकती हैं। हालांकि इस धनराशि का उपयोग कर्मचारियों के वेतन या स्थापना लागत जैसे खर्चों के लिए नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा प्रतिबंधित अनुदानों का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। इनमें स्वच्छता, खुले में शौच मुक्त स्थिति को बनाए रखना, घरेलू कचरा प्रबंधन, मानव मल और मल कीचड़ प्रबंधन जैसी सेवाएं शामिल हैं। साथ ही इन अनुदानों का उपयोग पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने और जल पुनर्चक्रण जैसी योजनाओं के लिए भी किया जा सकता है।
सरकार का मानना है कि इन अनुदानों से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इससे पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा। ग्रामीण विकास को मजबूत करने के लिए यह वित्तीय सहायता पंचायतों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन साबित हो सकती है।