India AI Summit 2026: लैंगिक समानता पर 23AI समाधान जारी
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India AI Summit 2026-Gender-AI-Casebook
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में जारी केसबुक में ग्लोबल साउथ के 23 एआई समाधान शामिल, जो लैंगिक समानता पर मापनीय प्रभाव दर्शाते हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की सराहना के बाद केसबुक को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली, जिससे समावेशी और नैतिक एआई विकास में भारत की भूमिका मजबूत हुई।
Delhi/ 17 फरवरी 2026 को आयोजित India AI Impact Summit 2026 में भारत ने समावेशी और नैतिक एआई विकास की दिशा में एक अहम कदम उठाया। एआई और लैंगिक सशक्तिकरण पर केंद्रित एक विशेष केसबुक का विमोचन किया गया, जिसमें ग्लोबल साउथ के 23 प्रभावशाली एआई समाधानों को शामिल किया गया है। यह पहल भारत की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें तकनीक को सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता के साथ जोड़ा जा रहा है।
यह केसबुक इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत संचालित IndiaAI Mission के माध्यम से, UN Women के सहयोग और Ministry of Women and Child Development के समर्थन से तैयार की गई है।
23 नवाचारी एआई समाधान शामिल
इस प्रकाशन में 50 से अधिक देशों से प्राप्त 233 आवेदनों में से चुने गए 23 एआई समाधानों को स्थान दिया गया है। इनका चयन बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत किया गया, जिसमें वास्तविक उपयोग, मापनीय लैंगिक प्रभाव और साक्ष्य-आधारित परिणामों को प्राथमिकता दी गई।
केसबुक में स्वास्थ्य सेवाएं (मासिक धर्म स्वास्थ्य सहित), आर्थिक सशक्तिकरण, डिजिटल सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन, शिक्षा एवं कौशल विकास और न्याय तक पहुंच जैसे क्षेत्रों में एआई के प्रभावी उपयोग को दर्शाया गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता
इस पहल को वैश्विक पहचान तब मिली जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव Antonio Guterres ने 20 फरवरी 2026 को जनएआई एक्सपो के दौरान यूएन वीमेन स्टॉल का दौरा किया। उन्होंने ग्रामीण समुदायों की युवा महिलाओं से संवाद किया, जो एआई आधारित वी-एसटीईएम परियोजना के तहत एसटीईएम करियर की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
नीति निर्माताओं के लिए उपयोगी संसाधन
यह केसबुक नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए एक व्यापक ज्ञान संसाधन के रूप में कार्य करेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एआई सिस्टम नैतिक, समावेशी और महिलाओं व लड़कियों की विविध आवश्यकताओं के अनुरूप हों। यह प्रकाशन लोकतांत्रिक एआई प्रसार के भारत के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करता है और यह दर्शाता है कि तकनीक के माध्यम से लैंगिक समानता को कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है।