भारत-जापान CEPA बैठक टोक्यो में संपन्न, व्यापार और निवेश बढ़ाने पर हुई अहम चर्चा

Wed 04-Mar-2026,09:06 PM IST +05:30

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भारत-जापान CEPA बैठक टोक्यो में संपन्न, व्यापार और निवेश बढ़ाने पर हुई अहम चर्चा India Japan Meeting
  • टोक्यो में भारत-जापान CEPA संयुक्त समिति की सातवीं बैठक.

  • व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा.

  • भारतीय निर्यात और जापानी निवेश बढ़ाने पर जोर.

Delhi / Delhi :

Delhi / भारत और जापान के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारत-जापान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के तहत सातवीं संयुक्त समिति की बैठक 2 मार्च 2026 को जापान की राजधानी टोक्यो में आयोजित की गई। इस बैठक में दोनों देशों ने समझौते के क्रियान्वयन की समीक्षा की और भविष्य में आर्थिक सहयोग को और विस्तार देने के तरीकों पर चर्चा की।

बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल और जापान सरकार के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ उप मंत्री ने की। इस दौरान दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश और आर्थिक साझेदारी से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

सीईपीए के क्रियान्वयन और आर्थिक सहयोग पर चर्चा
बैठक के दौरान दोनों देशों ने भारत-जापान सीईपीए समझौते के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा की। साथ ही यह भी देखा गया कि किन क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है।

दोनों पक्षों ने माना कि यह समझौता भारत और जापान के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इसके माध्यम से व्यापार में वृद्धि, निवेश के अवसर और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा मिला है।

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को और प्रभावी बनाने के लिए नए क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को तलाशना जरूरी है।

एमईटीआई के उप मंत्री से भी हुई मुलाकात
बैठक के दौरान वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय (एमईटीआई) के उप मंत्री से भी मुलाकात की। इस बातचीत में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ाने, व्यापारिक माहौल को बेहतर बनाने और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के आगामी 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

इस दौरान श्री अग्रवाल ने अगस्त 2025 में आयोजित भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के नेताओं द्वारा व्यक्त साझा दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ाने के लिए और अधिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

दोनों अर्थव्यवस्थाओं की पूरक ताकतों पर जोर
राजेश अग्रवाल ने भारत और जापान की अर्थव्यवस्थाओं के बीच मौजूद मजबूत पूरकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जापान के पास उन्नत प्रौद्योगिकी, पूंजी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग की मजबूत क्षमता है, जबकि भारत के पास कुशल कार्यबल, विशाल उपभोक्ता बाजार और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।

इन दोनों देशों की ताकतें मिलकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक विकास के लिए नए अवसर पैदा कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों के आवागमन को आसान बनाना और सीईपीए के अवसरों का पूरी तरह उपयोग करना दोनों देशों के लिए लाभदायक होगा।

भारतीय निर्यात बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा
बैठक के दौरान श्री अग्रवाल ने जापान में भारतीय निर्यात बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और सेवा क्षेत्र ऐसे क्षेत्र हैं, जहां भारतीय उत्पादों के लिए जापान में काफी संभावनाएं मौजूद हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए दोनों देशों के बीच व्यापार को अधिक संतुलित बनाने की आवश्यकता है। इससे दोनों देशों को समान रूप से आर्थिक लाभ मिल सकेगा।

उद्योग जगत के साथ भी हुआ संवाद
जापान दौरे के दौरान वाणिज्य सचिव ने एक गोलमेज सम्मेलन में जापानी उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ भी चर्चा की। इस बातचीत का उद्देश्य व्यापार और निवेश के नए अवसरों को बढ़ावा देना था।

इसके अलावा शाम को भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और जापान के प्रमुख उद्योग संगठन केइदानरेन के सहयोग से जापान स्थित भारतीय दूतावास द्वारा एक व्यापार और निवेश रोडशो का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में व्यापार को बढ़ावा देना और जापानी कंपनियों को भारत में अधिक निवेश के लिए प्रोत्साहित करना था।

निवेश के लिए भारत के अनुकूल माहौल पर जोर
इस अवसर पर राजेश अग्रवाल ने प्रतिभागियों को भारत में व्यापार और निवेश के लिए उपलब्ध अनुकूल नीतिगत माहौल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने और नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि सीईपीए समझौता एक स्थिर और भरोसेमंद ढांचा प्रदान करता है, जो शुल्क में स्थिरता और नियामक प्रक्रियाओं की स्पष्टता सुनिश्चित करता है।

इससे भारत और जापान के बीच वैश्विक मूल्य और आपूर्ति श्रृंखलाओं में विश्वसनीय साझेदारी को और मजबूत करने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होता है।