श्रीनगर में शीत जल मत्स्य पालन पर राष्ट्रीय सम्मेलन
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श्रीनगर में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में शीत जल मत्स्य पालन के विकास, नीति निर्माण और तकनीकी नवाचार के माध्यम से पहाड़ी क्षेत्रों में आजीविका बढ़ाने पर चर्चा होगी।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत शीत जल राज्यों में 2,299 करोड़ रुपये से अधिक निवेश से मत्स्य बुनियादी ढांचा, कोल्ड चेन और उत्पादन क्षमता मजबूत होगी।
जम्मू-कश्मीर/ भारत में शीत जल मत्स्य पालन की संभावनाओं को बढ़ावा देने और इस क्षेत्र के सतत विकास पर चर्चा के लिए 14 मार्च 2026 को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। सम्मेलन में नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के साथ मिलकर शीत जल मत्स्य पालन क्षेत्र की चुनौतियों, अवसरों और भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
यह राष्ट्रीय सम्मेलन मत्स्य पालन विभाग द्वारा आयोजित किया जा रहा है और इसमें जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की विशेष उपस्थिति रहेगी। कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, केंद्रीय राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल और जॉर्ज कुरियन के साथ-साथ कृषि उत्पादन विभाग के मंत्री जावीद अहमद डार भी शामिल होंगे।
सम्मेलन का उद्देश्य भारत में शीत जल मत्स्य पालन की अपार क्षमता को सतत विकास और आजीविका सृजन के साथ जोड़ना है। यह पहली बार होगा जब देश के विभिन्न राज्यों से नीति विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और हितधारक एक मंच पर आकर इस क्षेत्र के विकास के लिए व्यापक संवाद करेंगे।
भारत का शीत जल मत्स्य पालन मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्रों और पहाड़ी राज्यों में विकसित हुआ है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों के साथ-साथ पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। इन क्षेत्रों में मौजूद नदियां, झरने, झीलें और जलाशय शीत जल मछली प्रजातियों के लिए आदर्श पर्यावरण प्रदान करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार देश में लगभग 278 से अधिक शीत जल मछली प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें रेनबो ट्राउट, ब्राउन ट्राउट और महसीर जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियां शामिल हैं, जो मत्स्य पालन उद्योग को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत इस क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण निवेश किया है। शीत जल राज्यों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए लगभग 2,299.56 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं में आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास, मछली बीज उत्पादन, चारा प्रणाली, रेसवे सुविधाओं का निर्माण, परिवहन और कोल्ड-चेन नेटवर्क को मजबूत करना शामिल है।
सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह “शीत जल मत्स्य पालन के विकास के लिए मॉडल दिशानिर्देश” जारी करेंगे। इसके साथ ही पारंपरिक और प्रगतिशील मछुआरों, मत्स्य सहकारी समितियों और किसान क्रेडिट कार्ड लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता भी प्रदान की जाएगी।
कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के सर्वश्रेष्ठ मत्स्य उत्पादक संगठनों और नवाचार करने वाले मत्स्य स्टार्टअप्स को भी सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा तकनीकी सत्रों में अनुसंधान, प्रौद्योगिकी अपनाने, बुनियादी ढांचे के विस्तार और उद्यमिता विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे।
सरकार ने “कोल्ड वाटर फिशरीज विजन 2030” भी तैयार किया है, जिसका उद्देश्य ट्राउट और महसीर जैसी प्रजातियों के उत्पादन को दोगुना करना और पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। वर्तमान में भारत को सैल्मन और प्रीमियम ट्राउट जैसी मछलियों का आयात करना पड़ता है, जिसे घरेलू उत्पादन बढ़ाकर कम करने की योजना बनाई जा रही है।
यह राष्ट्रीय सम्मेलन देश के पहाड़ी और दूरदराज क्षेत्रों में मत्स्य पालन को नई दिशा देने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।