PM सूर्य घर योजना: सोलर से कमाई, सरप्लस बिजली पर भुगतान

Mon 02-Mar-2026,12:44 PM IST +05:30

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PM सूर्य घर योजना: सोलर से कमाई, सरप्लस बिजली पर भुगतान PM-Surya-Ghar-Solar-Income-Chhattisgarh
  • पीएम सूर्य घर योजना के तहत अतिरिक्त सोलर बिजली 2.60 रुपए प्रति यूनिट दर से पॉवर कंपनी खरीदेगी, उपभोक्ताओं को सालाना आय का अवसर।

  • केंद्र और राज्य सब्सिडी के बाद 3 किलोवाट सोलर सिस्टम मात्र 70 हजार रुपए में संभव, कम निवेश में दीर्घकालिक बचत सुनिश्चित।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur/ छत्तीसगढ़ में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर पैनल लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए अब अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी खुल गया है। घर की जरूरत से अधिक पैदा होने वाली सोलर बिजली को छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी 2.60 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदेगी। इससे उपभोक्ताओं को न सिर्फ बिजली बिल में राहत मिलेगी, बल्कि सालाना सरप्लस यूनिट पर आर्थिक लाभ भी प्राप्त होगा। योजना से ऊर्जा आत्मनिर्भरता और बचत दोनों को बढ़ावा मिल रहा है।

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत राज्य में रूफटॉप सोलर सिस्टम को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। पॉवर कंपनी के अनुसार यदि किसी उपभोक्ता के घर में सोलर पैनल से उत्पन्न बिजली उसकी मासिक खपत से अधिक होती है, तो अतिरिक्त यूनिट का वार्षिक समायोजन किया जाएगा। साल के अंत में सरप्लस यूनिट बचने पर उपभोक्ता को 2.60 रुपए प्रति यूनिट की दर से भुगतान किया जाएगा।

क्यों महंगी पड़ती है सामान्य बिजली?

राज्य पॉवर कंपनी से मिलने वाली बिजली की औसत दर 5 रुपए प्रति यूनिट से अधिक बैठती है। शुरुआती 100 यूनिट का टैरिफ भले ही 4.10 रुपए हो, लेकिन 11 प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी, प्रति यूनिट सेस, प्रति किलोवाट 20 रुपए फिक्स चार्ज और एफपीपीएएस शुल्क जुड़ने के बाद वास्तविक दर बढ़ जाती है। खपत बढ़ने पर बिल और ज्यादा हो जाता है।

सोलर पर मिल रही सब्सिडी

3 किलोवाट सोलर सिस्टम की अनुमानित लागत लगभग 1.80 लाख रुपए है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपए और राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपए की सहायता मिलती है। इस तरह उपभोक्ता को करीब 70-72 हजार रुपए ही खर्च करने पड़ते हैं। कम निवेश में लंबे समय तक मुफ्त बिजली का लाभ संभव है।

उत्पादन और संभावित कमाई

1 किलोवाट सोलर पैनल प्रतिदिन लगभग 4 यूनिट और महीने में करीब 120 यूनिट बिजली बनाता है। 3 किलोवाट सिस्टम से लगभग 360 यूनिट मासिक उत्पादन संभव है। यदि किसी घर की मासिक खपत 200 यूनिट है, तो सालाना 1200 से 1500 यूनिट तक अतिरिक्त बिजली बच सकती है। इस पर पॉवर कंपनी भुगतान करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना भविष्य में बढ़ते टैरिफ से सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और घरेलू स्तर पर आय सृजन का मजबूत विकल्प साबित हो सकती है।