कोयला क्षेत्र में टेक्नोलॉजी अपग्रेड: ड्रोन, AI से स्मार्ट माइनिंग
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कोयला मंत्रालय की बैठक में कोयला कंपनियों में प्रौद्योगिकी उन्नयन, डिजिटल खनन, ड्रोन सर्वेक्षण और एआई आधारित विश्लेषण के उपयोग पर व्यापक चर्चा की गई।
सरकार कार्बन कैप्चर, कोल गैसीफिकेशन और बायोमास को-फायरिंग जैसी उन्नत तकनीकों के जरिए कोयला क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में काम कर रही है।
New Delhi/ भारत के कोयला क्षेत्र में तकनीकी बदलाव और आधुनिक खनन प्रणाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की अध्यक्षता में कोयला मंत्रालय से संबद्ध सांसदों की परामर्श समिति की अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में कोयला कंपनियों में प्रौद्योगिकी उन्नयन, डिजिटल परिवर्तन और भविष्य की खनन रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार का लक्ष्य कोयला क्षेत्र को अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार बनाना है, ताकि ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ टिकाऊ विकास को भी मजबूती मिल सके।
नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, समिति के सदस्य, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा प्रमुख कोयला कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के दौरान अधिकारियों ने कोयला कंपनियों में लागू की जा रही नई तकनीकों, उनके प्रभाव और आने वाली योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की।
कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने बैठक की शुरुआत करते हुए सभी सदस्यों का स्वागत किया और देश में कोयले की मांग, उत्पादन क्षमता और भविष्य की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार खनन क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से कदम उठा रही है।
राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड खनन, अनुसंधान एवं विकास और कोयला गैसीकरण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि नई तकनीकों के उपयोग से खनन कार्यों की दक्षता और सुरक्षा दोनों में सुधार हो रहा है।
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि आज के दौर में प्रौद्योगिकी उन्नयन केवल एक विकल्प नहीं बल्कि कोयला क्षेत्र की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कोयला क्षेत्र में डिजिटल और तकनीकी क्रांति देखने को मिल रही है। ड्रोन सर्वेक्षण, 3डी लेजर स्कैनिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित विश्लेषण के जरिए खनन को अधिक स्मार्ट और सुरक्षित बनाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज, बायोमास को-फायरिंग और कोल गैसीफिकेशन जैसी उन्नत तकनीकों को बढ़ावा दे रही है, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हुए ऊर्जा उत्पादन को टिकाऊ बनाया जा सके।
कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष बी. साईराम ने बताया कि कंपनी अपने संचालन में व्यापक तकनीकी सुधार कर रही है। इसके तहत 3डी भूकंपीय सर्वेक्षण, ड्रोन तकनीक, निरंतर खनन मशीनें और हाईवॉल सिस्टम जैसे आधुनिक उपकरणों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा नए रेलवे कॉरिडोर और कन्वेयर सिस्टम के जरिए कोयला परिवहन को भी अधिक कुशल बनाया जा रहा है।
बैठक में यह भी बताया गया कि नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन (एनएलसी) ने डिजिटलीकरण और आधुनिक निगरानी प्रणालियों के माध्यम से अपने संचालन में उल्लेखनीय सुधार किया है। कंपनी ने भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण, डिजिटल लॉजिस्टिक मैनेजमेंट और ड्रोन आधारित सर्वेक्षण जैसी तकनीकों को लागू किया है।
वहीं सिंगारेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड ने भी एकीकृत कमांड सेंटर, ड्रोन आधारित जीआईएस सर्वेक्षण और लॉजिस्टिक्स मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी तकनीकों को अपनाकर परिचालन दक्षता बढ़ाई है।
बैठक के अंत में समिति के सदस्यों ने मंत्रालय की पहल की सराहना करते हुए सुझाव दिया कि तकनीकी नवाचार और अनुसंधान के जरिए कोयला उत्पादन को और अधिक सुरक्षित, कुशल और पर्यावरण-अनुकूल बनाया जाना चाहिए।