उपराष्ट्रपति का आह्वान: युवा बनें विकसित भारत 2047 के निर्माता
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युवाओं को मादक पदार्थों से दूर रहने, प्रौद्योगिकी का जिम्मेदारी से उपयोग करने और उद्यमिता के माध्यम से रोजगार सृजन पर ध्यान देने की सलाह दी।
उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र में कनेक्टिविटी, रेलवे, उड़ान और पीएम-डिवाइन जैसी योजनाओं से विकास की गति तेज होने और नए अवसरों के सृजन की बात कही।
आइजोल/ भारत के उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने मिजोरम विश्वविद्यालय के 20वें दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए उनसे वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने स्नातक होने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि आज का दिन उनके जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। उपराष्ट्रपति ने युवाओं से केवल नौकरी खोजने तक सीमित न रहकर नए अवसरों के निर्माण और देश के विकास में योगदान देने का संदेश दिया।
आइजोल स्थित Mizoram University के 20वें दीक्षांत समारोह में बोलते हुए उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने विश्वविद्यालय परिसर की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की। उन्होंने कहा कि मिजोरम विश्वविद्यालय देश के सबसे सुंदर परिसरों में से एक है और यह इस बात का उदाहरण है कि शांत वातावरण और उद्देश्यपूर्ण शिक्षा से किस प्रकार उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
उपराष्ट्रपति ने पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर भारत में हुए विकासात्मक बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश के विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं। बेहतर कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे के विकास और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र को नए अवसरों से जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने हाल ही में शुरू हुई Bairabi–Sairang Railway Line का जिक्र करते हुए कहा कि यह परियोजना मिजोरम के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी। इसके अलावा UDAN Scheme और PM-DevINE जैसी योजनाएं भी पूर्वोत्तर राज्यों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने युवाओं से उद्यमिता की ओर कदम बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसे अवसरों का सृजन करना चाहिए जो समाज और देश के लिए लाभकारी हों।
उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र में पर्यटन, बांस आधारित उद्योग, जैविक कृषि, हस्तशिल्प और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं बताईं। उनके अनुसार यदि इन क्षेत्रों में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाए तो यह क्षेत्र आर्थिक विकास का बड़ा केंद्र बन सकता है।
उपराष्ट्रपति ने युवाओं में मादक पदार्थों के बढ़ते खतरे पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने विद्यार्थियों से मादक पदार्थों से दूर रहने और अनुशासित तथा उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की अपील की। साथ ही उन्होंने प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने की सलाह देते हुए कहा कि युवाओं को तकनीक का गुलाम बनने के बजाय उसका स्वामी बनना चाहिए।
उन्होंने मिजोरम की उच्च साक्षरता दर, समृद्ध प्राकृतिक विरासत और मजबूत जनजातीय परंपराओं की भी सराहना की। साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा सौर ऊर्जा के उपयोग की पहल को सराहनीय बताया और युवाओं से पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का आग्रह किया। इस अवसर पर मिजोरम के राज्यपाल Vijay Kumar Singh, मुख्यमंत्री Lalduhoma, विश्वविद्यालय के कुलपति Dibakar Chandra Deka, संकाय सदस्य, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।